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गांधी, नेहरू ही है इनके उद्धारक
- By 24hnbc --
- Sunday, 26 Mar, 2023
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समाचार -
बिलासपुर, 27 मार्च 2023। भारतीय जनता पार्टी जब कभी भी जहां कहीं भी संकट में आती है उसके उद्धारक अर्थात उसे उतारने वाले दो ही होते हैं। पहला महात्मा गांधी जी और दूसरा जवाहरलाल नेहरू जी आप इतिहास उठाकर देखें जब कभी भी भारतीय जनता पार्टी के लिए लांछनात्मक स्थितियां आती है वे किसी ना किसी बहाने महात्मा गांधी और नेहरू पर गलत तथ्यों के साथ, या बगैर तथ्य के कुछ भी कहना प्रारंभ कर देते हैं। ग्वालियर में जम्मू कश्मीर के महामहिम पद के कारण सम्मानीय मनोज सिन्हा जी ने गांधी जी की शिक्षा के बारे में जो कुछ कहा, उसके यही कारण है। मैं गांधी जी पर कुछ कहने या लिखने की हिम्मत इसलिए करता हूं की मैंने अपनी जिंदगी में मात्र 30 मिनट महाराष्ट्र के एक छोटे से स्थान जिसका वजन बहुत है पौनार आश्रम में वंदनीय विनोबा भावे जी के चरणों में बिताएं। उनके साथ 10 मिनट की जो वार्तालाप हुई उससे ज्ञात हो गया कि महात्मा गांधी कितना विशाल व्यक्तित्व रहे होंगे। आगे जब उच्च शिक्षा में समकालीन भारतीय दार्शनिक को विश्वविद्यालय में एक विषय के तौर पर पड़ा तब उस विश्वविद्यालय में केवल किताब आधारित पढ़ाई नहीं थी किताब में लिखी बातों को यदि संभव हो तो देखकर निरीक्षण करके नापतोल लिया जाता था तभी महात्मा गांधी पर एक प्रश्न पत्र के रूप में महात्मा गांधी को पढ़ा और विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुसार जब मौका मिला तो गांधी संग्रहालय में पड़ी हुई चीजों को देखने का मौका भी मिला। इसलिए कश्मीर के राज्यपाल महामहिम मनोज सिन्हा जी ने जो कुछ ग्वालियर के एक विश्वविद्यालय में कहा उसका घोर प्रतिकार करने के लिए तैयार हूं। सिन्हा जी ने कहा है कि मैं अनेक लोगों और पढ़े लिखे लोगों को भ्रांति है कि गांधी जी के पास लॉ की डिग्री थी। गांधीजी के पास कोई डिग्री नहीं थी अभी मैं बताऊंगा कुछ लोग मंच पर भी आकर प्रतिकार करेंगे लेकिन मैं तथ्यों के साथ आगे बात करूंगा। सिन्हा जी ने आगे कहा हम में से कई लोग यह सोचते हैं कि उनके पास कानून की डिग्री थी लेकिन उनके पास यह नहीं थी उनकी मात्र एक योग्यता हाई स्कूल डिप्लोमा थी। मैंने राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय घुमा है उसी संग्रहालय में 1891 में बार एट लॉ का जो सर्टिफिकेट जारी हुआ था उसे रखा गया है। दस्तावेज का नंबर भी लिखा है जो कि 7910 था इतना ही नहीं संग्रहालय में एडमिशन का खर्च स्टैंप ड्यूटी का भी जिक्र है। राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय में और भी ऐसे दस्तावेज हैं जो बताते हैं कि महात्मा गांधी बैरिस्टर थे। वह सूची भी इसी संग्रहालय में है जिससे पता चलता है कि बार एट लॉ की परीक्षा किस-किस ने पास की इस सूची में गांधीजी का नाम 17 वें नंबर पर है। महात्मा गांधी ने जिस दौर में वकालत की तब सत्ता ऐसी नहीं थी कि कोई व्यक्ति अपनी फर्जी डिग्री रखकर सत्ता के सामने खड़ा हो जाए। हमने शारीरिक रूप से गांधी जी की हत्या कर दी और तब से ना जाने कितनी बार उनके विचारों की हत्या करते हैं सत्ता में बैठे लोग जब कभी भी परेशानी में आते हैं खासकर यह विचारधारा जो आरएसएस से पोषित पल्लवित होती है अपने को बचाने के लिए गांधी नेहरू के विचारों के हत्या में जुट जाते हैं। आज यदि मेरी डिग्री पर शंका की जा रही है तो मैं राष्ट्रपिता की डिग्री पर शंका कर दूंगा तब मेरी वह डिग्री जो सोशल मीडिया पर जिस फाउंड में दिखाई जाती है छुप जाएगी। भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने जो अब सहयोग से देश के गृहमंत्री हैं ने गांधीजी को चतुर बनिया कहा था, तो एक कदम आगे बढ़कर होने के फोलोवर गांधीजी के बैरिस्टर होने पर ही प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। वे जिस राज्य के उपराज्यपाल हैं वहां गुजरात का आया हुआ एक नागरिक जेड प्लस सुरक्षा पा जाता है और उन्हें भनक नहीं लगती लगता है अपने अपने स्तर पर दोनों एक ही काम कर रहे हैं। गलत लोगों को संरक्षण देना बीजेपी की पुरानी परंपरा है और यही चल रहा है महात्मा गांधी विश्व मानव थे जो लोग आज देश की सत्ता पर बैठे हैं जहां कहीं भी जाते होंगे उन्हें महात्मा गांधी का दर्शन होता होगा और यहीं से उनकी हीन भावना प्रारंभ हो जाती है कभी हमें मजा आता है अपने ही इतने बड़े विचारक की तोहीन करने में। मनोज सिन्हा जी ने ग्वालियर में जो कुछ कहा हम उम्मीद करते हैं कि इस देश में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधीजी जिस जिस शहर गए होंगे उस उस शहर में मनोज सिन्हा जी के गलत वक्तव्य का खंडन होगा। गांधीजी बिलासपुर भी आए थे और बिलासपुर शहर में कानून के बड़े जानकारों की लंबी परंपरा है अतः हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम मनोज सिन्हा जी के गलत वक्तव्य पर आम लोगों की जानकारी को सही रखें।


