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जल, जंगल, जमीन न तो बीजेपी का एजेंडा है न आरएसएस का, फिर कैसे बचेगी आदिवासी संस्कृति
- By 24hnbc --
- Tuesday, 15 Nov, 2022
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समाचार :-
बिलासपुर, 16 नवंबर 2022। आरएसएस प्रमुख ने हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरा किया वह जसपुर गए। भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस हमेशा राष्ट्रवाद की बात करते हैं पर उनकी मुख्य बातों में जल, जंगल, जमीन और उसमें रहने वाले कभी भी मुख्य पात्र नहीं होते, ऐसा क्यों...... पावर टू पीपुल का सीधा अर्थ है जनता से जुड़े मुद्दों पर बात करना और भाजपा उसके नेता हमेशा इससे कतराते हैं, कभी तो महंगाई, बेरोजगारी उनकी समस्या में नहीं आते वे लोककला, लोक संस्कृति, संगीत, लोक अर्थव्यवस्था, लोक दर्शन को प्रभावी तरीके से टच ही नहीं करते, हां वे सब कुछ को सनातन में समा देने की बात को ही राष्ट्रवाद मानते हैं। स्वतंत्रता के बाद पिछले 10 सालों में विकास के नाम पर जन जाति ,समाज का जितना विस्थापन हुआ है उतना कभी नहीं हुआ। अंडमान निकोबार से लेकर भारत का कोई भी ऐसा राज्य जहां आदिवासी समुदाय निवास करता हो ऐसा नहीं बचा जहां पर कारपोरेट घुसा ना हो और कारपोरेट के पक्ष में पूरी लुटियन ने दिल्ली खड़ी रहती है इस लुटियन ने दिल्ली के सड़क छाप चमचे पूरे देश में फैले हैं फिर चाहे लोहरसी हो, या हसदेव अरण्य हो जनजाति के जीवन दर्शन को कोई जैसी वह है उस रूप में देखना नहीं चाहते तभी तो आरएसएस प्रमुख इन दिनों छत्तीसगढ़ ज्यादा आ रहे हैं और आदिवासियों की पृथक पहचान को सनातन के माध्यम से समाप्त करना चाहते हैं। भारत के समस्त आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र किसी ना किसी रूप से बहिष्करण के शिकार हैं विकास के नाम पर विस्थापन और पुनर्वास के नाम पर धोखाधड़ी जग जाहिर तथ्य है आश्चर्यजनक बात यह है कि भारत में संसाधन बाहुल्य क्षेत्र पर भारत के सबसे गरीब लोग निवास करते हैं। इन असहाय और निर्धन बना दिए गए लोगों की पीड़ा पर बोलने लिखने वाले को बड़े आसानी से वामपंथी कह दिया जाता है लेकिन जनजातियों की आवाज उठाने वाला हमेशा राष्ट्रवाद के खिलाफ बात करता हो ऐसा नहीं है। संसाधन संपन्न क्षेत्र जहां जल, खनिज और जमीन की प्रचुरता होती है वहां कारपोरेट पहुंचता ही हैं। और जो वहां के मूल बाशिंदे होते हैं उन्हें विस्थापित करके स्वयं ऊपर आना चाहता है। पहाड़ पर मंदिर है तो वह बच जाएगा लेकिन यदि खनिज है तो लूट लिया जाएगा। तो क्या समझे हर पहाड़ पर धार्मिक स्थान बना दिया जाए। जीवन में किस स्थान का कितना महत्व है यह समझे बिना जनजाति, संस्कृति की रक्षा बाहरी लोग नहीं कर सकते हैं।


