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पूंजीपतियों को सीधा जवाब तमनार का कोयला सत्याग्रह
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समाचार -
बिलासपुर, 6 अक्टूबर 2022। जब देश की सरकार निजी करण के लिए नतमस्तक हो गई है तब रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड का 1 गांव कोयला सत्याग्रह के साथ पूरे देश के सामने निजीकरण के खिलाफ, पूंजी पतियों के खिलाफ आदर्श बन गया है। 10 साल से अधिक हो गया प्रत्येक 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन रायगढ़ जिले की 4 तहसील रायगढ़, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, तमनार के ग्रामीण कोयला सत्याग्रह कार्यक्रम में शामिल होते हैं। यह ग्रामीण किसी भी स्थिति में अपनी जमीन नहीं देना चाहते, 2008 में एक फर्जी जन सुनवाई हुई थी तभी से यह ज्यादा सजग हैं और उनका साफ कहना है कि जमीन हमारी तो संसाधन हमारे तो मालिकाना हक भी हमारा कार्यक्रम खुले मंच के समान है कोई भी ग्रामीण इस कार्यक्रम में शामिल होकर अपनी बात रख सकता है कार्यक्रम ऐसा की गांव के प्रत्येक परिवार से ₹20 चंदा होता है और इसी चंद्र राशि से, आने वाले को खाना और अन्य जरूरतों की पूर्ति करते हैं इस बार झारखंड, उड़ीसा, तमिलनाडु से बहुत सारे लोग पहुंचे तथ्य यह है 5 जनवरी 2008 में गारे 4/6 कोयला खदान की जनसुनवाई, खम्हरीया जनसुनवाई के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका भी लगी है। एनजीटी का फैसला भी ग्रामीणों के पक्ष में था। 25 सितंबर 2011 ग्रामीणों ने एक फैसला किया देश को कोयले की जरूरत है तब हम अपनी कंपनी बनाकर स्वयं कोयला निकाले और इसी विचार ने गारे ताप उपक्रम कंपनी लिमिटेड का गठन किया। इसमें 700 एकड़ जमीन का एग्रीमेंट हुआ है और कोयला निकालने का काम ग्रामीण ही करते हैं पुलिस प्रशासन ने बहुत दबाव बनाया ग्रामीणों को सुप्रीम कोर्ट के केस से राहत मिली। आदिवासी वैसा विकास नहीं चाहते जैसा हो रहा है। यहां के लोग किसी भी कीमत पर किसी भी मुआवजे के लिए अपनी जमीन नहीं छोड़ते, असल में रायगढ़ जिले का यह तमनार गांव पूरे देश में सत्याग्रह का आधुनिक आदर्श है जो पूंजीपतियों के सामने जल, जंगल और जमीन के रखवालों को हमेशा ताकत देता है।


