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राहुल गांधी की आईडियोलॉजी को ठेंगा दिखा रहा छत्तीसगढ़ का संस्कृति विभाग, वर्मा सृजन संवाद सावरकर को बताया राष्ट्रभक्त कभी नहीं हो सकते सांप्रदायिक

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समाचार :-
बिलासपुर, 18 सितंबर 2022 । श्रीकांत वर्मा पीठ छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन का आयोजन के कार्यक्रम श्रीकांत वर्मा सृजन संवाद में पहले सत्र की अध्यक्ष सुश्री रंजना अरगड़े भोपाल में यह कहते हुए कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी कि उस लड़ाई पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया जिसके सहारे वे आरएसएस से दो-दो हाथ कर रहे हैं। अरगड़े ने कहा कि श्रीकांत वर्मा ने लिखा है कि सावरकर जैसा राष्ट्रभक्त सांप्रदायिक नहीं हो सकता में उन्हें नमन करता हूं। अंडमान यात्रा के दौरान सावरकर की कोठरी के सामने खड़े होकर मेरी आंख भी गिर गई और फिर शर्म से झुक गया। एक राष्ट्रवादी व्यक्ति को ऐसी घोर यातनाएं और हम उसे सांप्रदायिक कहते हैं। सावरकर राष्ट्रभक्त थे, राष्ट्रवादी थे और ऐसा व्यक्ति कभी सांप्रदायिक नहीं हो सकता। इस बिंदु पर यदि कोई मुझसे अलग होना चाहे तो हो जाए यहां यह उल्लेखनीय है कि श्रीकांत वर्मा कांग्रेस पार्टी के संगठन में ना केवल बड़े-बड़े पदों पर रहे बल्कि उन्हें और बाद में उनकी पत्नी वीणा वर्मा को कांग्रेस ने एक से अधिक बाद राज्यसभा भेजा। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वायनाड से सांसद राहुल गांधी आरएसएस से विचारधारा की लड़ाई लड़ रहे हैं और इसी संदर्भ में कांग्रेस के कई नेता तमाम डिबेट में सावरकर पर काफी कठोर टिप्पणियां करते देखे जाते हैं। ऐसे में संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के आयोजन में रंजना अरगड़े ने सावरकर की प्रशंसा कर एक नया विवाद छेड़ दिया है। उन्होंने सावरकर के बारे में जो कुछ कहा वह सब कुछ श्रीकांत वर्मा का लिखा हुआ है ऐसा उन्होंने कहा उन्होंने ऐसा यह भी कहा कि ऐसे राष्ट्रभक्त के नाम की पट्टी जब 2004 में एक कांग्रेसी नेता ने उखाड़ फेंकी तो यह अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है। इसी कार्यक्रम में एक दूसरा विवादित वक्तव्य डॉ अरविंद त्रिपाठी गोरखपुर का है, उन्होंने हिंदी के प्रख्यात समालोचक अज्ञेय के बारे में बेहद कटु टिप्पणी की त्रिपाठी ने कहा कि अज्ञेय हिंदी कविता की जड़ों में मट्ठा डालते रहें 1940 से 60 के बीच अज्ञेय ने सर्वाधिक फर्जी कवियों को प्रश्रय देने का काम अज्ञेय ने किया। श्री त्रिपाठी ने यह भी कहा कि श्रीकांत वर्मा अपने समय के प्रखर मेघावी, ओजस्वी कवि थे इसके बावजूद अज्ञेय ने अपने काव्य संग्रह तार सप्तक में उन्हें स्थान नहीं दिया जब श्री त्रिपाठी का संबोधन चल रहा था तो ऐसा लग रहा था जैसे त्रिपाठी जी श्रीकांत वर्मा को अज्ञेय से ऊपर रख रहे हैं। और अज्ञेय को उस श्रेणी में डाल रहे हैं जिनके कारण हिंदी साहित्य की दुर्दशा हुई। श्रीकांत वर्मा सृजन संवाद कार्यक्रम 18 से 20 तारीख तक आयोजित है और यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ आयुष विज्ञान संस्थान सिम्स के ऑटोटोरियम में चल रहा है । 
        हमने इसके पहले भी श्रीकांत वर्मा पीठ छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के बारे में तथ्यात्मक समाचार लिखे हैं और बताया है कि कैसे जल संसाधन विभाग का एक डिप्लोमा इंजीनियर वामपंथी साहित्यकार को सेवानिवृत्ति के पूर्व में ही को इस पीठ का दायित्व दिया गया।