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हिंसा भड़काने की साजिश तो गहरी थी केवल माफी मांगने से काम नहीं चलेगा
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। जी न्यूज़ के एंकर राहुल रंजन के खिलाफ आईपीसी की धारा 504,505,153ए, 295ए, 120 बी तथा आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ। पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस जिस तरह उन्हें बचाने कूदी इस बात का अंदेशा गहरा जाता है कि ज़ी न्यूज़ के स्टूडियो में कांग्रेस के बड़े नेताओं के खिलाफ एक गहरी साजिश तो रची गई थी। नोएडा पुलिस ने आईपीसी की धारा 502 सार्वजनिक शरारत और दुश्मनी के लिए अनुकूल बयान के तहत मामला दर्ज किया उसी रात मुचलका दे दीया। और उसके बाद रोहित रंजन सपरिवार गायब हो गए। ज़ी न्यूज़ जिस हल्के फुल्के तरीके से माफी मांग रही थी उससे स्पष्ट है की साजिश गहरी थी न्यूजरूम के जानकार यह जानते हैं कि जब कभी भी किसी कार्यक्रम की जिम्मेदारी बाटी जाती है तो एंकर और प्रड्यूसर की भूमिका उस कार्यक्रम को बनाने में क्या होती है कैसे सामग्री ली जाती है कहां से क्या कट पेस्ट किया जाता है गलती और साजिश के बीच अंतर होता है। किसी भी न्यूज़ चैनल का प्राइम टाइम कार्यक्रम अचानक नहीं बनता पहले सुबह की मीटिंग फिर शाम की मीटिंग में पूरी कार्ययोजना बनती है कच्चे माल को देखा जाता है फिर उसे फाइनल किया जाता है ऐसे में मानवीय भूल की गुंजाइश बेहद कम होती है एक शब्द बदल जाना मानवीय भूल हो सकती है किंतु पूरा कंटेंट बदलना साजिश के अंतर्गत आता है। ज़ी न्यूज़ के उस तारीख के प्राइम टाइम को देखने पर यह साफ नजर आता है यदि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल एक्शन नहीं लिया होता तो केवल राजस्थान नहीं आसपास के राज्य भी क्रिया के प्रतिक्रिया के तहत हिंसा की आंच में झुलस रहे होते। छत्तीसगढ़ पुलिस केवल एफआईआर लेकर नोएडा नहीं गई थी उसके पास सक्षम न्यायालय से जारी किया गया गिरफ्तारी वारंट भी था। उल्टे गाजियाबाद पुलिस जिस तरह से जिसके कहने पर भी कूदी उन की तैयारी में कई लोचे नजर आते हैं। हालांकि अब यह मामला उच्चतम न्यायालय के पास है, किंतु उसमें भी एंकर के अधिवक्ता ने जिस तरह से अपने क्लाइंट की पैरवी की यह तो पता चलता भी है कि वहां भी प्रोफेशनल मिसकंडक्ट किया गया कुल मिलाकर इस प्रकरण में हिंसा, शांति, नैतिकता, पत्रकारिता के सामान्य सिद्धांत की जो भद्र पीटी है उससे पत्रकारिता को फिर से शर्मसार होना पड़ा।


