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कोई बने राज्यपाल कोई बने महामहिम सिलगेर में जारी है आदिवासियों का आंदोलन
- By 24hnbc --
- Monday, 27 Jun, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सुकमा, सिलगेर का आंदोलन किसानों के प्रदर्शन के बाद ऐसा दूसरा आंदोलन है जिसे चलते हुए 1 साल से ज्यादा दिन बीत चुका यह आंदोलन भले ही घने जंगलों के अंदर चल रहा है आदिवासियों का कहना है कि सुरक्षा बल कैंप के कारण जंगल काट रहे हैं निर्दोष लोगों को नक्सली बताकर जेल भेज रहे हैं। 1 साल से चलता यह आंदोलन पिछले माह की 12 मई को फिर से सुर्खियों में आया आदिवासी ग्रामीण सुरक्षा बलों के खिलाफ गोलबंध होने लगे उनका कहना है कि पुलिस सुरक्षा बल ड्रोन से हमला करते हैं बीजापुर के एसपी इन बातों का खंडन करते हैं वह कहते हैं आंदोलन स्वत: प्रेरित नहीं है माओवादी ग्रामीणों को फरमान जारी करते हैं सिरगेर में जहां यह मंच बना है मूलवासी बचाओ मंच का बैनर भी लगा है। आदिवासियों की एक ही मांग है बस्तर में सुरक्षा बलों के कैंप नहीं लगने चाहिए। बस्तर में जो नरसंहार हुआ उसमें मारे गए लोगों के आश्रितों को 1 करोड़ और घायल को 50 लाख मुआवजा बिना ग्राम सभा की अनुमति न तो कैंप लगे और न ही पेड़ कटे, ग्रामीणों का साफ कहना है 17 मई को सुरक्षाबलो ने गोली चलाई बड़ी संख्या में लोग मारे गए पुलिस इससे इंकार करती है। बस्तर संभाग के दौरे पर गए मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को बताया था सिलगेर गोली कांड की जांच कराई गई है रिपोर्ट आ गई है रिपोर्ट के आधार पर जल्द कार्यवाही भी की जाएगी मुख्यमंत्री की इस घोषणा को 1 महीने से ज्यादा समय बीत चुका। सिलगेर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल की तैनाती है बहुत से क्षेत्र को नो एंट्री जोन भी बना दिया गया है। राज्य सरकार कभी माओवादियों से संवाद की बात करती है कभी आदिवासियों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश करती है जांच की रिपोर्ट पर कार्यवाही मुआवजे के बिना लोगों को भरोसा करना मुश्किल हो रहा है यही कारण है कि धरना लगातार जारी है। पिछले विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में बड़े-बड़े वादे किए थे परिणाम पूरा बस्तर कांग्रेस की झोली में गिरा, आदिवासी स्वयं को फिर से माओवादी और सुरक्षा बल के बीच पिस्ता हुआ पाते हैं वह पहले भी पीस रहे थे और अभी भी पीस रहे हैं ऐसे में छत्तीसगढ़ के आदिवासी यह सोचने पर मजबूर हैं कि कभी हमारा सगा राज्यपाल बनाया जाता है और इस बार राष्ट्रपति भी बन जाएगा हम तो कहने के दत्तक पुत्र हैं बाकी नसीब तो दो पाटों के बीच में पीसना ही लिखा है।


