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ऊर्जा क्षेत्र में कोयले का संकट उसी रफ्तार से बढ़ रहा है अवैध कोयले का धंधा

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। यूं तो कहानी बहुत पुरानी है किंतु हम कहानी का यह हिस्सा 24 जनवरी 2018 से शुरू करते हैं। पथरिया पुलिस थाना में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता के समर्थक नरेंद्र कौशिक के कोल डिपो पर मुंगेली एसपी पारुल माथुर ने कार्यवाही की थी। 120 टन अवैध कोयला पकड़ा गया डिपो संचालक न तो कागज प्रस्तुत कर सका ना ही कोई ऐसे दस्तावेज जो कोयले के एक नंबर होने का सबूत दें। मामला 2018 का है तब देश में कोयले की ऐसी क्राइसिस नहीं थी जैसी इन दिनों है। कोयला परिवहन को लेकर आम आदमी से लेकर बड़े बिजनेस टायकून तक परेशान हैं, किंतु बिलासपुर जिले के वैद्य अवैध 70 प्लस 150 कोल डिपो पर वैसी कार्यवाही होते दिखाई नहीं देती जैसी वर्ष 2013 में हुई 13 जनवरी 16 अप्रैल 14 मार्च यह वे तारीखें हैं जब पुलिस की 12 नहीं 15 -15 टीमों ने एक साथ 22 डिपो पर ताबड़तोड़ कार्यवाही की थी, तब 1000 टन, 55 टन, 120 टन, 5 टन अवैध कोयला और दर्जनों हाईवा, जेसीबी जैसी मशीनें जप्त की गई थी। अब तो सकरी थाना पुलिस को अनुराग श्रीवास्तव, अखिलेश यादव, पंकज सिंह के कोरबा घर जाने तक में और जांच करने में पसीना छूटता है यह मामला 75 टन कोयला चोरी का है बिलासपुर क्षेत्र के नामी अवैध कोयला क्षेत्र बगदेवा, मोहतराई, हिर्री, सकरी, जागेंद्र कश्यप कोल डीपो, मां तारा कोल डिपो, लोखंडी में एमएस स्नेहा दीपक सिंह राज कोल डीपो जैसे दर्जनों नाम कोयले के वैध अवैध कारोबार से जुड़े हैं। कोयले की अफरा-तफरी स्टार्टिंग पॉइंट से ही शुरू हो जाती है बदनामी केवल एसईसीएल की है 1 साल में दर्जनों बार सीबीआई एसईसीएल के चक्कर काटती है। बंद कंपनियों के नाम पर लिंकेज का कोयला आज भी उठ रहा है। स्टार्टिंग प्वाइंट से कोयले का परिवहन सड़क मार्ग से रेलवे ट्रैक से कितना होता है दोनों के बीच कितना अनुपात है और उस अनुपात में वैध अवैध का धंधा दोनों सेक्टर में किस प्रतिशत का है इस बात को ध्यान में रखें तो पता चलता है की सड़क मार्ग पर कोयले के धंधे में चोरी 50% तक पहुंच चुकी है। तभी तो हम याद दिला रहे हैं कि 1 साथ 15 टीम की कार्यवाही एक ही डीपो पर 120 टन की कार्यवाही को यही पुलिस अधिकारी याद क्यों नहीं करते आखिर किसने इनके हाथ बाधे हैं। आज जब पूरा देश कोयले के संकट से जूझने वाला है सिर पर मानसून है और तापीय विद्युत कारखानों पर कोयले का स्टॉक नहीं हो रहा है तो क्या पुलिस की गाड़ियां हाईवे पर केवल कार और दोपहिया का कागज देखने को खड़ी है, आखिर यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ के सफेदपोश कोयला तस्करों की गर्दन पर व्यवस्था का पंजा क्यों नहीं पड़ता.....