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जिला बदर का चेहरा और हमारे बदलते सामाजिक आदर्श
- By 24hnbc --
- Sunday, 12 Jun, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। 22 फरवरी 2022 राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 क, ख, 5 क, ख के तहत बिलासपुर कलेक्टर ने नितेश निखारे उर्फ मैडी के विरुद्ध जिला बदर की कार्यवाही की थी। उसके विरुद्ध विभिन्न थानो में मारपीट, बलवा, हत्या के प्रयास जैसे 28 प्रकरण दर्ज हैं। आदेश में कहा गया है कि बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, मुंगेली, जांजगीर चांपा, गौरेला पेंड्रा मरवाही, बलोदा बाजार, रायपुर जिलों की सीमा के बाहर रहना पड़ेगा बिना अनुमति इन जिलों में आने पर भी कार्यवाही होगी । अभी इस आदेश को 6 महीने नहीं हुए बिलासपुर की तासीर एक शांत शहर की है इसकी यही आबोहवा बनी रहे यह प्रयास हम सब काम होना चाहिए। कुछ दिन पूर्व सिविल लाइन थाना क्षेत्र में समता कॉलोनी पार्क में जो हत्याकांड हुआ उसके पीछे केवल गैंग से जुड़े लोगों का हाथ बताया जाता रहा, मास्टरमाइंड वसीम खान जिसके इशारे चाकू चल रहे थे वह आज भी फरार है और उसकी फरारी में ही पुलिस का चालान भी प्रस्तुत हुआ शहर में जिन नेताओं की शह पर वह दम भरता दिखता था उनके नाम सब जानते हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि जनाब का जन्मदिन आए और शहर में उन्हें भी उनकी गैंग वाले पोस्टर लगाकर शुभकामनाएं देते नजर आए। पोस्टर की प्रथम पंक्ति में जिन नेताओं के चेहरे दिखाई दे रहे हैं उनका नाम लोकप्रियता, पद, प्रतिष्ठा, प्रभाव से सब वाकिफ हैं। यह चुनाव संहिता तो है नहीं, कि कोई किसी का चेहरा पोस्टर पर लगाए और उनकी अनुमति आवश्यक हो। फिर भी शहर के निर्वाचित निकाय के मुखिया, प्रभारी मंत्री, विधायक, महापौर का फोटो एक जिला बदर की कार्यवाही झेल रहे आपराधिक तत्व के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हो उसकी गैंग का नाम नीचे लिखा है और इस शहर में पोस्टर सार्वजनिक हो निगम का दस्ता उन्हें ना हटा रहा हो तो जनमानस को संदेश क्या जाता है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि का आशीर्वाद और सहयोग क्या ऐसे ही तत्वों के साथ है और बिलासपुर के सैकड़ों युवा के लिए क्या यही लोग रोल मॉडल हैं। क्या इन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपने वोट बैंक की तनिक भी चिंता नहीं होती या यह माने की वोट तो यही लोग दिलाते हैं फिर ऐसी खुली नुमाइश से क्या बचना एक समय था नेताओं के घर में कार्यालय में ऐसे चेहरों को आने जाने के पहले 10 बार सोचना पड़ता था, शायद वह समाज गुजरे जमाने की बात हो गया जभी यदि समय रहते कांग्रेस संगठन और उनके जिम्मेदार मुखिया ने अपनी कार्यप्रणाली को नहीं सुधारा तो वह दिन दूर नहीं जब पार्टी के कई अनुषांगिक संगठनों पर केवल और स्वयं जैसे ग्रुप हावी हो जाएंगे । तभी तो मंथन की एक समीक्षा बैठक में पड़ोसी जिले लोरमी के विधायक ने कहा अब तो चला चली की बेला है।


