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डिजिटल जमाने में सहकारिता विभाग की यह कैसी कार्य प्रणाली लगरा पर मेहरबान है सहकारी निरीक्षक

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर सहकारिता विभाग के आदेश इतने धीमी गति से आगे बढ़ते हैं कि साल दर साल गुजरने के बाद भी कमपोजिट भवन से आदेश कार्यान्वयन के लिए लगरा तक पहुंचने का सफर पूरा नहीं होता । हां 2022 जब देश के प्रधानमंत्री श्री मोदी को डिजिटल क्रांति का शंखनाद करते 8 साल हो गए आदेश पलक झपकते अपने मुकाम पर पहुंचते हैं किंतु बिलासपुर जेआर का आदेश जो कोयला कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित को भंग करने के लिए 2018 में निकला था वह कभी भी लगरा पहुंचा ही नहीं, आदेश निकलने के बाद भी जिस निरीक्षक को रिसीवर बनाया गया था उसने तब तक समिति पहुंचकर कार्यभार ग्रहण करना उपयुक्त नहीं समझा जब तक समिति को उच्च न्यायालय से स्टेटस मेंटेन नहीं हो गया। प्रकरण चला कुछ माह बाद समिति सिंगल बेंच में हार गई। अब फिर से सहकारी निरीक्षक को समिति का कार्यभार लेना था लेकिन वह तब तक नहीं गए जब तक समिति डीबी में सिंगल बेंच के ऑर्डर के खिलाफ स्टे नहीं पा गई अब 2021 में समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया और डीआर ने धारा 49/8 के तहत संचालक मंडल के कार्यकाल का अवसान हो जाने के कारण प्राधिकृत अधिकारी बिठाला आदेश 11/1/2021 को निकला इस आदेश में 1-2 नहीं 19 समितियों पर प्राधिकृत अधिकारी बैठाले गए 18 में पहुंच भी गए किंतु एक विशेष समिति कोयला कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित में प्राधिकृत अधिकारी नहीं पहुंचा हाल ही में डीआर ने इसी समिति का परिसीमन कर दिया है और परिसीमन के लिए अधिकारी की नियुक्ति भी हो गई है किंतु अभी तक परिसीमन अधिकारी समिति के दफ्तर नहीं पहुंच सके । यह बात समझ नहीं आती की कोयला कर्मचारी सरकारी समिति सहकारिता निरीक्षकों को समिति कार्यालय तक ना आने के विरुद्ध कौन सी विशेष सुविधा दे रहा है जानकार बताते हैं वर्ष 2012-13 से लगरा समिति का ऑडिट नहीं हुआ है । धारा 53 के तहत भंग किए जाने के बाद से स्वयंभू अध्यक्ष ने करोड़ों रुपए की रजिस्ट्री किए हैं समिति के लिए जमीन खरीदे हैं और यह सब विधि शून्य हैं क्योंकि विधि अनुसार तो समिति का अवसान हो चुका है जो समिति भंग हो जाए उसका अध्यक्ष जमीन का क्रय विक्रय करते घूमे तो उसके द्वारा संपादित कार्यों को विधि शून्य ही माना जाएगा।