संदर्भ श्रीकांत वर्मा स्मृति आयोजन
पीठ और न्यास के पीछे छुपा है कौन? आयोजक है मौन
- By 24hnbc --
- Friday, 27 May, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बड़े दिनों के बाद श्रीकांत वर्मा को लेकर 2 दिनों में 4 कार्यक्रम धकापेल हो गए। एक आयोजन श्रीकांत वर्मा न्यास दिल्ली के द्वारा आयोजित था ।श्रीकांत वर्मा की पुत्रवधू द्वारा पत्रकार वार्ता थी। श्रीकांत वर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण था ।और बड़ा कार्यक्रम छत्तीसगढ़ शासन के श्रीकांत वर्मा पीठ द्वारा सिम्स में आयोजित कार्यक्रम था, जो तीन चरण में चलने वाला एक दिवसी वृहद आयोजन माना गया। शहर अकबका गया,धकपका गया। शहर भकभका गया । शहर चारों तरफ बैनर पोस्टर से अटा पड़ा था। कार्यक्रम कि ही चर्चा थी, धूम मची थी। हर तरफ बैनर पोस्टर लहरा रहे थे। बिजली के खंभों पर श्रीकांत वर्मा के कार्यक्रमों के ही पोस्टर दिखाई पड़ रहे थे ।लोगों का कहना है कि- शहर में होने वाले किसी भी साहित्यिक कार्यक्रम का इस तरीके से प्रचार नहीं हुआ है। विघ्नसंतोषियों का कहना है कि,----""" बैल एक तो चलता नहीं और चलता है तो मेढ़- पार फोड़ देता है----‐-"""""" । नदिया यूं तो सूखी रहती है जब पूर आती है तो तटों - कूलों के बंधन तोड़ देती हैं। इसी तरह नारी जब अपनी पर आती है तो वह कुछ भी कर सकती है गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं-----"""का न करें अबला प्रबल ,केही जगु काल न खाई-----""""। जब आदमी तय कर ले वह कुछ भी कर सकता है लोगों का कहना है कि श्रीकांत वर्मा आयोजन के पीछे श्रीकांत वर्मा की राजनीतिक विरासत पर कब्जा जमाना है परंतु बड़ा सवाल यह है कि, क्या श्रीकांत वर्मा की कोई राजनीतिक विरासत वर्तमान में बची है ? बाहर हाल रातों-रात लोगों का सक्रिय होना कुछ गड़बड़ी की ओर इशारा तो जरूर करता है। वर्षों पहले बिलासपुर में श्रीकांत की स्मृति में छोटे -मोटे कार्यक्रम हुए हैं परंतु, इस तरह गजपेलन कार्यक्रमों का होना, नई बात है । श्रीकांत वर्मा जी के हथियार व्यापारी पुत्र अभिषेक वर्मा की पत्नी अर्थात रोमानिया की बेटी, बिलासपुर की बहू एंका वर्मा एकाएक पर्दे पर उतरती है; --"बिलासपुर कि पावन धरा--""पर अवतरित होती है--- ---""""आप आए तो खयाल -ए- दिले नाशाद आया, कितने भूले हुए जख्मों का पता याद आया-----""""। एंका वर्मा आती हैं और सबसे पहले सम्मिलित होती है ताजा-ताजा बने श्रीकांत पीठ के आयोजन में मजे की बात यह है कि इस सरकारी पीठ को आज तक एक कार्यालय नसीब नहीं हो पाया है परंतु यह एक व्यक्ति द्वारा संचालित पीठ आठ -दस लाख रूपये का आयोजन मजे से कर लेता है ।इस तरह आयोजन का संपन्न होना लोगों को अचंभित कर रहा है।लोग पूछ रहे हैं- -----""""परदे के पीछे कौन है? परदे के पीछे .....""""।बरफ खाने गये और आइसक्रीम खाने को मिले तो अजूबा तो होगा ही । इसी तरह लखीराम ऑडिटोरियम में श्रीकांत वर्मा न्यास दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ ।जिसमें श्रीकांत वर्मा के विरोधी भी गिरगिट की तरह रंग बदल कर पहुँच गए थे । इसके अलावा और अन्य कार्यक्रमों में हिंदी नहीं बोल पाने वाली एंका वर्मा की उपस्थिति से लोगों के माथे पर बल पड़ गए हैं । अपने फौज -फाटे के साथ, निजी भारी सुरक्षा व्यवस्था, तगड़ी पुलिस व्यवस्था, अधिकारियों की उपस्थिति में पत्रकार वार्ता में एंका वर्मा ने साफ शब्दों में कहा है कि-' उनकी इस यात्रा के राजनीति अर्थ नहीं निकाले जाने चाहिए।' फिर भी टिप्पस भिड़ाने वाले ,सट्टे -लाटरी का नंबर बताने वाले लोग कह रहे हैं कि, जिस एंका का कभी यहां आना नहीं हुआ वह एकाएक चार कार्यक्रम कर चली आए, जरूर ----""दाल में कुछ काला है----""। ---""""" बदले-- बदले से मेरे सरकार नजर आते हैं, हमें तो गम के आसार नजर आते हैं-----"""""। राज्यसभा के चुनाव को लोगों ने 3 तरीके से देखा है( 1)या तो स्वयं के लिए अथवा दूसरों के लिए लेकिन कुल मिलाकर उसका फायदा उन्हीं लोगों को होगा ,क्योंकि यहां जो ताकतवर है अर्थात कोयला, रेत, पानी या जंगल, शिक्षा जैसे बड़े व्यवसाय से जुड़े हैं (इन्हें माफिया भी कह सकते हैं) अर्थात यह आयोजन उस तरह के लोगों को लाभान्वित कर सकते हैं। वर्तमान में राज्यसभा के समीकरण आने वाले दिनों में राष्ट्रपति के समीकरण को प्रभावित करने वाले होंगे यह बात ज्यादा ध्यान रखने योग्य है । लोग यह तो समझ रहे हैं ----"""दाल में कुछ तो काला है ----"""।लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा है कि पर्दे के सामने नाचने वाले लोगों को न जाने वाले लोग नचा रहे हैं? कौन लोग हैं जो पर्दे के पीछे छुप कर सामने कठपुतलियां नचा रहे हैं? लोग गा रहे हैं ----"""जरा सामने तो आओ छलिए छुप-छुप चलने में क्या राज है?------"""" । झुमुकलाल, घुंघरुदयाल, उड़न प्रसाद, उड़ता उड़ेन्द्र भी कह रहे हैं--"""" बोल री कठपुतली, डोरी कौन संग बांधी -----""""? लेकिन कठपुतली नचाने वाले इतने सयाने तो होते ही हैं कि, वे चुप कर कठपुतलियां नचाते हैं, और मजा लेते हैं ।इसी क्रम में लुके -छिपे लोगों ने एक और शिगूफा फेंक दिया है कि-- एकाएक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का, साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लोग कांग्रेस की राजनीति में नया अखाड़ा तैयार कर दिया । एक बात यह भी कही जा रही है कि हसदेव कोल ब्लाक के विरोध को कमजोर करने की साजिश भी यह आयोजन । इतिहास गवाह है, जब -जब जनता सरकार के विरुद्ध जागरूक होती है तब -तब सरकार इसी तरीके से राग -रंग ,नाच- गान, मनोरंजन के साधन जनता के सम्मुख परोस देती है, और जनता नाच- गान राग-रंग में हंसकर भूल जाती है।-----"""" भूल गए रास - रंग ,भूल गए चौकड़ी; याद रहा बस अब नून, तेल, लकड़ी----"""। लोग कह रहे हैं कि अन्ना आंदोलन के समय लाइट बंद होने की घटना से जोड़कर इन आयोजनों को देखा जा सकता है। सरकार लोगों का ध्यान बांटने के लिए इस तरीके से कार्यक्रम करती है। कुल जमा मामला यह है कि एंका वर्मा की सक्रियता राज्यसभा चुनाव से जोड़ती है दूसरी बात छत्तीसगढ़ का बहुत ताकतवर माफिया है वह इस आयोजन के पीछे संभावित है, तीसरी बात हसदेव आंदोलन से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश हो सकती है और चौथी बात कांग्रेस कमेटी के पीछे छुपे हुए कुछ लोग हैं जो एक नए तरीके से कांग्रेस को सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं। यहां ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि बिना निमंत्रण हर कार्यक्रम में पहुंच जाने वाले विधायक इस कार्यक्रम में अनुपस्थित रहे हैं ।अर्थात ---"""कुछ तो गड़बड़ है ---""""ऐसा जनता का कहना है। -----""""देखते हैं क्या गड़बड़ी है? ऐसी भी क्या हड़बड़ी है ?---"" ""नाई -नाई कितने बाल? हुजूर अभी सामने आ जाता है! -----"""""। इसी तरीके से----""""- कब तक छुपेगी कैरी पत्तों की आड़ में? आना ही होगा उसे बाजार में ------""""।। बहुत जल्दी सच्चाई सामने आ जाएगी ।


