No icon

24hnbc

अवर सचिव ने निकाला था तबादले का आदेश बिलासपुर में पड़ा घूरे में

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । एक समय था जब नगर पालिक निगम बिलासपुर के 79 अभियंताओं की नौकरी एक साथ संकट में पड़ गई थी और सभी की नौकरी को जबलपुर उच्च न्यायालय ने विधि शून्य घोषित कर दिया था। आज भी राज्य शासन के एक आदेश के अनुसार यह पद सांकेतर माने जाते हैं हालांकि लक्ष्मी पुत्र अभियंताओं ने सरकार के इस आदेश को ठेंगा दिखा रखा है और अब तो नई पीढ़ी के इंजीनियर सरकारी आदेशों को स्वता ही कूड़ेदान में डाल देते हैं तभी तो तबादला होने के 7 दिन के भीतर की जॉइनिंग का आदेश कहीं घुरे में पड़ा होगा । न्यायधानी पर नगर पालिक निगम विभाग में एक से बढ़कर एक साहब पदस्थ है जिनका सिक्का बिलासपुर से रायपुर तक चलता है। जिनके सामने बड़े-बड़े अफसर, नेता मंत्री भी पानी भरते हैं। भले ही इनमें से कुछ साहबो ने बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की धरती को चीर – चीर कर बेतरतीब तरीके से खोद डाला और जिला को खोदापुर में तब्दील कर दिया। और कुछ अधिकारियों ने तो खोदापुर प्रोजेक्ट पर काम करके भ्रष्टाचार को अंजाम देकर अपने लिए कई जगह आलीशान बंगला तैयार कर लिया है। और उसे किराए पर चढ़ा कर लाखों रुपए महीना कमा रहे हैं। लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी उन भ्रष्ट साहबो का जी अभी नहीं भरा है। इसीलिए तो नगरी प्रशासन एवं विकास विभाग के उप सचिव का स्थानांतरण आदेश आने के बाद भी बिलासपुर को चारागाह समझने वाले कुछ अधिकारी यहां से जाना नहीं चाह रहे हैं। और जिले में ही रह कर अपना सिक्का(खोटा वाला) चलाना चाह रहे है। जिन्हें बिलासपुर की आम जनता पसंद नहीं करती है। क्योंकि इन्हीं साहबो कि मेहरबानी से बिलासपुर कि जनता को सालों से अन्न के साथ धूल खाना पड़ा है।
 
गौरतलब है कि नगरी प्रशासन एवं विकास विभाग ने 30 सितंबर 2021 व 21फरवरी2022 को प्रदेशभर में कार्यरत नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर पालिक निगम के अंतर्गत इंजीनियर व सब इंजीनियर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी का स्थानांतरण आदेश जारी किया था। जिसके तहत नगर पालिक निगम बिलासपुर में कार्यरत उप अभियंता, सहायक अभियंता का भी ट्रांसफर किया गया था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 सितंबर 2021 के स्थानांतरण आदेश के अनुसार बिलासपुर नगर निगम से 12 इंजीनियर का स्थानांतरण किया गया था। जिसमें 7 अधिकारियों को रिलीव करना बताया जा रहा है। बाकी शेष 5 अधिकारियों में से 4 अधिकारी का संशोधित आदेश आने की चर्चा है। इनमें से सर्वाधिक चर्चा का विषय बनने वाला एक उप अभियंता का स्थानांतरण स्थगन आदेश है। जिसमे कि माननीय न्यायालय के द्वारा दिए गए वर्ष 2020 के स्थगन आदेश जो अन्य जिला के लिए था उसको दिखाकर एक उप अभियंता ने अवर सचिव से संशोधित आदेश पाने में सफलता हासिल कर लिया है। बताया जाता है कि इस महत्वपूर्ण कार्य को करने के लिए उक्त अधिकारी ने रायपुर मंत्रालय में बैठे एक साहब के स्वास्थ्य का ख्याल रख कर 6 अंको के हरियाली से कड़ाके की ठंड दिसंबर 2021 में जेब गर्म करने का कार्य किया गया है।
 
 
इसके अलावा इन दिनों निगम के दफ्तरों पर एक चर्चाएं जोरों पर यह भी है कि दिनांक 21 फरवरी 2022 को स्थानांतरण किए गए अन्य अधिकारी भी अपना स्थानांतरण को संशोधित आदेश में परिवर्तित करने का जुगाड़ में लगे हैं। संभवत उनका यह प्रयास सफल भी हो सकता है क्योंकि जो बचे अधिकारी हैं वह पुराने व मंजे हुए खिलाड़ी है। क्योंकि पूर्व में भी मंत्रालय से इस तरह से आये स्थानांतरण आदेश को खानापूर्ति करते हुए 2 साल कोरबा जिला में बिता दिए है और अब बिलासपुर जिले में ही रह कर मौज कर रहे हैं। जी हां हमारे बिलासपुर जिला के नगर पालिक निगम में एक से बढ़कर एक होनहार वह मंजे हुए अधिकारी बैठे हैं जो मंत्रालय से आए स्थानांतरण आदेश को भी अपने साम, दाम, दंड, भेद, की कला से चलता कर देते हैं। और अपना स्वार्थ सिद्धि के लिए इच्छा अनुसार संशोधित आदेश करा लेते हैं।
 
फरवरी 2022 को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़े पैमाने पर थोक के भाव में प्रदेश भर से 63 अधिकारी व कर्मचारी का स्थानांतरण आदेश जारी किया था । जिसमें भृत्य, राजस्व उप नरीक्षक, सहायक राजस्व निरीक्षक, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, सहायक अभियंता का नाम शामिल है। उक्त स्थानांतरण आदेश के अनुसार सहायक अभियंता प्रवीण शुक्ला को बिलासपुर से जगदलपुर के लिए स्थानांतरित किया गया था। सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेज के अनुसार उक्त साहब का स्थानांतरण के पश्चात उनके लिए पुनः संशोधित आदेश, यथास्थिति आदेश, माननीय न्यायालय से स्थानांतरण पर प्राप्त स्थगन आदेश, यह फिर ऐसा कोई आदेश नगर पालिक निगम बिलासपुर के पास उपलब्ध नहीं है जिसके कारण उक्त अधिकारी को बिलासपुर नगर निगम में ही कार्य करने की अनुमति मिली हो
 
लेकिन बावजूद इसके सहायक अभियंता प्रवीण शुक्ला के ऊपर नगर निगम बिलासपुर के कुछ अधिकारी मेहरबान है। इसलिए उन्हें स्थानांतरण आदेश आने के 86 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक रिलीव नहीं किया गया है। जबकि स्थानांतरण आदेश पर स्पष्ट उल्लेख है। उपरोक्त अधिकारी कर्मचारी सात दिवस के भीतर नवीन पदस्थापना स्थान पर कार्य ग्रहण करेंगे। समय अवधि पर कार्य ग्रहण नहीं करने पर वर्तमान स्थान से वेतन आहरित नहीं होगा। यदि वेतन आहरित किया जाता है तो नियंत्रण अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी लेकिन बावजूद इसके सहायक अभियंता प्रवीण शुक्ला को रिलीव नहीं किया गया है। बहर हाल देखने वाली बात होगी कि हमारे समाचार के बाद संबंधित विभाग के उच्च अधिकारी किस तरह की कार्यवाही करते है।