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परशुराम रैली को लेकर असमंजस, 3 को कलश तो 4 को रैली
- By 24hnbc --
- Thursday, 28 Apr, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। एक तरफ पूरे शहर में सर्व ब्राह्मण समाज के बैनर पोस्टर एकता का दावा करते नजर आ रहे हैं जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है। बैठक के सूत्रों पर भरोसा करें तो 14 अप्रैल की एक बैठक में यह तय हुआ था कि अक्षय तृतीया होने के कारण परशुराम जयंती की रैली 4 मई को निकाली जाए और इस पर सभी संगठनों की सहमति थी किंतु अब यह सहमति टूटती नजर आ रही है । नई योजना के अनुसार 3 मई को कलश यात्रा रख ली गई है कलश यात्रा कौन निकाल रहा है किसके नेतृत्व में हो रही है इस बात को गुप्त रखा जा रहा है कानाफूसी के अनुसार यह कहा जा रहा है कि कलश यात्रा का संदेश एक विपक्षी राजनीतक दल से संबंध रखने वाले नेता के इशारे पर हुआ है। वही कुछ लोग इसे एक स्वर्ण नेता के तरफ से चली गई चाल बताते हैं। भीषण गर्मी में कलश यात्रा में कौन महिलाएं आएंगी इसका भी निदान निकाल लिया गया है कलश लेकर निकलने वाली महिलाओं के ब्राह्मण होने पर ही शंकाएं हैं .... ऐसा माना जा रहा है कि यह भीड़ किराए से लाई जा रही है सब का मानना है कि कलश यात्रा में केवल सर्व ब्राह्मण समाज की महिलाएं शामिल होगी जो कि संभव नहीं है। इसके पूर्व जब कभी भी कथा आयोजन के पूर्व शहर में कलश यात्राएं में हुई है उनमें जाति प्रतिबंध का कोई सवाल ही नहीं था किसी भी समाज के महिलाएं कलश लेकर आ जाती थी या ले आई जाती थी किंतु अब मामला सर्व ब्राह्मण समाज की कलश यात्रा का है तो स्वाभाविक कलश यात्रा में कलश लेकर चलने का काम सर्व ब्राह्मण समाज की महिलाओं के सर पर आएगा जो की संख्या में इतनी नहीं है और पारिवारिक संस्कार सडक पर 45 डिग्री टेंपरेचर में कलश लेकर निकलने की इजाजत नहीं देते ऐसे में अन्य वर्ग से महिलाओं को लाना मजबूरी है क्योंकि संख्या बल दिखाना है किंतु कलश यात्रा से सबसे पहले 14 अप्रैल की बैठक का निर्णय खंडित होता है जिसमें परशुराम जयंती की रैली 4 मई को निकालने का निर्णय हुआ था। 28 तारीख के बैठक में कुछ युवा नेता इस बात को लेकर रोष भी जाहिर कर रहे थे कि जब 3 मई को रैली परंपरा है तो 1 दिन आगे क्यों बनाई गई जबकि वरिष्ठ सर्व ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों का मानना है कि अक्षय तृतीया के दिन सर्वाधिक वैवाहिक कार्यक्रम होते हैं मांगलिक कार्यक्रम होते हैं और कर्मकांडी ब्राह्मणों के लिए आर्थिक उपार्जन का दिन होता है ऐसे में पारंपरिक ब्राह्मण रैली में नहीं आते अतः 1 दिन आगे रैली रखी जाए किंतु किसी विघ्न संतोषी ने 3 मई को कलश यात्रा का आयोजन रख दिया बैठक में ऐसा करने वालों को दंडित करने की मांग भी उठती रही वरिष्ठ जन यही कहते रहे यह संभव नहीं है।


