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रायगढ़ में ही मतदाताओं ने क्यों चुना था अपना महापौर एक किन्नर को आज मिला जवाब...

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर 2 अप्रैल 2022। 
कहने को हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां पर लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता और महिलाओं को समाज में ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिले इसकी पहली सिढी राजनीति को ही माना जाता है। छत्तीसगढ़ में एक औद्योगिक शहर है रायगढ़ जो इन दिनों सुर्खियों में हैं कारण किसी एक राजनीतिक दल में महिला नेत्रीओं पर अपशब्द की बौछार नहीं सभी महिला नेत्री इस भेदभाव से परेशान हैं। मार्च के आखिरी हफ्ते में भारतीय जनता पार्टी की आधा दर्जन से अधिक महिलाएं रायपुर राजधानी में छत्तीसगढ़ के बड़े भाजपा नेता के पास इसी आशय की शिकायत लेकर गई थी उनका कहना था कि जिला स्तर पर उनके खिलाफ भाजपा के कुछ नेता अपशब्द कहते हैं छींटाकशी कहते हैं। इसी संदर्भ में नगर अध्यक्ष ज्ञानेश्वर गौतम का इस्तीफा भी हो गया। महिला नेत्री कैसे घटिया पत्रकारिता भया दोहन की पत्रकारिता का शिकार होती है इसका एक उदाहरण 31 मार्च को मिला जब एक न्यूज़ पोर्टल पर लगातार नकारात्मक खबरों के दबाव के चलते कांग्रेस की महिला पार्षद संजना शर्मा ने अपने जीवन को समाप्त कर लेना ही उचित समझा....। हालांकि उन्होंने इतनी हिम्मत दिखाई की अपने पत्र में उन्होंने प्रताड़ित करने वाले पत्रकार का नाम खुलासा किया कहने का आशय यह है कि रायगढ़ में दशकों बीत जाने के बाद भी राजनीति में महिलाओं को वह सम्मान प्राप्त नहीं हो रहा जिसकी वे हकदार हैं। उत्तरदाई कौन.....? कुछ माह की खबरों की सुर्खियां बताती हैं कि राजनीति में एक महिला दूसरी महिला को नीचा दिखाने के लिए जनप्रतिनिधि के कक्ष में घुसकर अपशब्द कहने से बाज नहीं आती जब एक महिला नेत्री, बरखा सिंह दूसरी महिला नेत्री संजना शर्मा को अपशब्द कहेगी तो समाज महिला नेत्री का सम्मान कैसे करेगा। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी अछूती नहीं है नेता प्रतिपक्ष पूनम सोलंकी महिला नेत्री हैं और उन्हीं के राजनीतिक दल में आधा दर्जन महिलाए पुरुषों के उत्पीड़न की शिकार हैं शोध का विषय है कि छत्तीसगढ़ में रायगढ़ में ही आम मतदाताओं ने सीधे वोट का इस्तेमाल करते हुए एक किन्नर को महापौर क्यों चुना, शायद यह लिंग विभेद का जवाब है जब राजनीति में घटिया पन आ जाता है तो उस घटिया पन का जवाब एक किन्नर ही घटिया पन से दे सकता है आज पूरे समाज को यह सोचना चाहिए कि राजनीति में हम हल्कापन, ओछापन, घटियासोच से निजात कैसे पाएंगे कांग्रेस के लिए यह स्थिति विकट है उनकी राष्ट्रीय नेतृत्व का तो नारा ही है लड़की हूं लड़ सकती हूं तो यह नारा संजना ने क्यों नहीं सुना और यदि सुना तो अपने में आत्मसात क्यों नहीं कर पाई।