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कलेक्टर के प्रति नाराजगी आम से खास तक

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर, 23 मार्च 2022 छत्तीसगढ़ में इन दिनों नौकरशाही से त्रस्त लोगों की संख्या हजारों में है और यह आक्रोश अब परिसर का गेट तोड़कर कलेक्टर चेंबर के सामने तक खड़ा हो गया है और कलेक्टर है कि आम जनता से मिलना ही नहीं चाहता नाराजगी की श्रेणी में आम नागरिक भी है, विधायक मंत्री भी है और यहां तक की कलेक्टर से यह नाराजगी विधानसभा अध्यक्ष की भी है अब प्रश्न उठता है कि प्रदेश का मुखिया ऐसी नौकरशाही के बूते 2024 का विधानसभा चुनाव जीतने की सोच भी कैसे सकता है अगर लोकतांत्रिक शब्दों में कहें विधायिका और कार्यपालिका के बीच का संतुलन बिगड़ गया मीडिया को तो बहला-फुसलाकर इस तरह चुप रखा जाता है कि सुकमा से लेकर बिलासपुर तक और बिलासपुर से रायपुर होते हुए दिल्ली तक खबरें मैनेज हो जाती है। अखबारों में सुकमा की खबर बेहद कम शब्दों में हैं और असल बिंदुओं को हटाकर आदिवासी युवाओं के आक्रोश को केवल नौकरी से जोड़ दिया गया जबकि सर्व आदिवासी समाज का कल का धरना 20 सूत्रीय मांगों को लेकर था जिसमें प्रमुख मांग ऐसडमेटा मैं अपने घर गवा चुके आदिवासी को मुआवजा देने का मुद्दा भी है फर्जी जाति प्रमाण पत्र से नौकरी कर रहे लोगों की तत्काल बर्खास्तगी का भी है किंतु एक मात्र अजीत जोगी के प्रकरण के बाद फर्जी आदिवासी प्रकरणों के मामले अब सरकार के एजेंडे के बाहर है।