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हथकंडे ना आए काम एनएसयूआई नेता बना आरोपी, रैली में शामिल कांग्रेसी चेहरों की हुई आलोचना...

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर - 25 फरवरी को तालापारा समता कॉलोनी गार्डन में नाबालिग नवीन महादेवा की हत्या व एक अन्य पर जानलेवा हमला के बाद हत्याकांड में एक एनएसयूआई नेता वसीम खान का नाम लगातार आ रहा था। कांग्रेस के एक गुट से ताकत पाते हुए पहले वसीम खान ने स्वयं अपना ज्ञापन दिया कहा कि वह षड्यंत्र का शिकार हो रहा है। मृतक के पिता ने स्थानीय विधायक शैलेश पांडे से संपर्क किया विधायक ने गृहमंत्री वह पुलिस के उच्च अधिकारियों से बात की भरोसा मिला निष्पक्ष जांच होगी इसी बीच मामले ने धार्मिक रंग भी ले लिया 8 मार्च को सर्व हिंदू समाज के पदाधिकारियों ने सिविल लाइन थाना के सामने चक्काजाम, धरना किया राजनैतिक संरक्षण का आरोप लगाते वसीम खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिन लोगों ने धरना प्रदर्शन का नेतृत्व किया उनकी पहचान शहर में शांति प्रिय नागरिकों के रूप में जानी जाती है, कोई डॉक्टर है, कोई प्रोफेसर तो निर्वाचित जनप्रतिनिधि किंतु इस धरना प्रदर्शन के 1 दिन बाद अचानक उत्पन्न हुए एक अन्य गुट ने भगवा झंडे से लेस होते हुए वसीम खान को बचाने के लिए जो रैली निकाली उसे उसकी प्रतिक्रिया आम नागरिकों के बीच भी निंदा की ही रही यहां तक की नाम न छापने की शर्त पर कांग्रेस के ही कुछ नेताओं ने रैली में शामिल पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासमक कार्यवाही होनी चाहिए कि बात की, जिन्होंने रैली देखी रैली के दौरान बनाए गए फुटेज और फोटो देखकर कुछ लोगों को यह भी अचरज हुआ की रैली में कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी जिसमें प्रवक्ता भी हैं किस तरह से व्यवहार कर रहे थे क्या ऐसी रैली के आयोजन के पूर्व शहर अध्यक्ष या जिला ग्रामीण से अनुमति ली गई थी या उन्हें सूचना दी गई थी। कांग्रेस में ही अपने कार्यकर्ताओं की अनुशासनात्मक हीनता को लेकर चर्चा में हैं इस रैली में कांग्रेस के ही वे विवादास्पद चर्चित चेहरे भी शामिल थे जिनका विवादों से पुराना नाता है । 8 मार्च की रैली सर्व हिंदू समाज की थी तो 10 मार्च की रैली सर्व समाज की थी समझ के बाहर की पुलिस को निष्पक्षता से जांच ना करने देना जांच की बारीकियों पर जनचर्चा का दबाव बनाना वह भी सत्ताधारी पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं के द्वारा बाधित करना किस तरह उचित ठहराया जा सकता है। 
शहर में अमन बना रहे इसके लिए विपक्ष से ज्यादा सत्तापक्ष की जिम्मेदारी है कुछ ही दिन पूर्व समिति की बैठक होली त्यौहार के संदर्भ में हुई, सीधा अर्थ है तालापारा हत्याकांड और उस क्षेत्र में चल रही गैंग के चलते स्थितियां संवेदनशील है ऐसे में यदि पुलिस को ऐतिहातन कुछ प्रतिबंधात्मक कार्यवाहीयां भी करनी पड़े तो भी उचित है। एक विवादास्पद नेता को बचाने के लिए सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोग सड़क पर झंडे लेकर जुलूस निकाले इसे उचित नहीं कहा जा सकता, साथ में धर्म को राजनीति में घसीटना और भी निंदनीय है इस सबके बीच बिलासपुर पुलिस की कप्तान का धन्यवाद अदा किया जाना चाहिए जिन्होंने जांच एजेंसी के व्यावसायिक रुख को कायम रखा और जांच में पड रहे दखल और दबाव के बीच निष्पक्ष जांच में अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का हौसला बनाए रखा तभी परिणाम है कि वसीम खान का नाम एफआईआर में बतौर आरोपी जोड़ा गया इस मामले में अब तक 10 आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है।