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किसके दबाव में फिर से प्रारंभ हुआ अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । बिलासपुर में एक बार फिर से अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसा नहीं है कि इसके पहले इस योजना के अंतर्गत अनाधिकृत निर्माण के नियमितीकरण नहीं हुए सर्वप्रथम 2001, 2003 में इस योजना का लाभ दिया गया और कुछ लोगों ने इसका लाभ उठाया भी बाद में 2013-14 में चुनाव को ध्यान में रखकर संशोधित नियमों के साथ फिर से योजना लागू हुई बिलासपुर में हजारों आवेदन पत्र टीएनसी एवं निगम में जमा हुए आमतौर पर 3 दफ्तरों की संयुक्त बैठक मंथन सभागार में होती थी सब जानते हैं लेकिन दोबारा याद दिलाना अत्यंत आवश्यक है कि किस तरह अनाधिकृत निर्माण स्थल पर संयुक्त टीम ने जांच के समय जबरदस्त वसूली का धंधा फैला लिया था धीरे-धीरे प्रकरण कम होते गए और मोल भाव बढ़ता चला गया। सैकड़ों की संख्या में अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण के तहत आये आवेदन पत्र अमान्य भी किए गए छोटी छोटी चीजों के बारे में सरकार आम सूचना के माध्यम से सूचनाओं को आम करती है किंतु सामान्य आवेदन पत्रों के बारे में खामोश रहे गिने चुने लोगों ने आमाननीय हो चुके प्रकरणों पर अपीलेट कोर्ट से स्टे लिया। जानकार बताते हैं कि बिलासपुर में 1 दर्जन से अधिक होटल, 2 दर्जन रेस्टोरेंट्स, 57 नर्सिंग होम, 5 बड़े बिजनेस मॉल सहित अनगिनत बहुमंजिला इमारतें अवैध रूप से खड़ी हैं। शिकायत करने पर निगम भवन के मूल स्वामी को नोटिस देते हैं उदाहरण के तौर पर एक प्रकरण में व्यापार विहार स्थित महादेव अस्पताल द्वारा प्रस्तुत अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण आवेदन पत्र खारिज कर दिया गया कारण नियमितीकरण लोगों के हित में ना होना बताया गया शिकायतकर्ता ने नगर पालिक निगम बिलासपुर के आयुक्त को दस्तावेजी प्रमाण के साथ शिकायत की निगम ने अनावेदक का पक्ष जानने के लिए शिव कुमार सराफ को नोटिस जारी किया भवन में अस्पताल संचालित है स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवेदक डॉक्टर है। अनाधिकृत विकास का नियमितीकरण में आवेदक डॉक्टर है किंतु निगम डॉक्टर को नोटिस जारी न कर पूर्व भवन स्वामी को नोटिस देता है इस एक उदाहरण से ही समझ आता है कि निगम प्रभावशाली लोगों के दबाव में किस तरह काम करता है। नई गाइडलाइन के मुताबिक जिस भी व्यवसाय स्थल पर पार्किंग नहीं है उसे नाम मात्र का जुर्माना 50000 लगाकर इमारत को वैधता प्रदान कर दी जाएगी इसी श्रृंखला में कई लॉज नियमितीकरण के दायरे में आ जाएंगे आखिर सरकार और स्थानीय प्रशासन शहर के व्यवस्थित बसाहट के संदर्भ में इस तरह का समझौता क्यों कर रही है। एक तरफ स्मार्ट सिटी का हल्ला किया जाता है और दूसरी तरफ नियमितीकरण के दायरे में न आने वाली इमारतों को जैसे-तैसे नियमितीकरण का ठप्पा लगाया जा रहा है यही हाल रहा तो शहर की बसाहट कभी भी ठीक नहीं हो पाएगी। 
 
( यह डॉक्यूमेंट का पहला पन्ना है पूरा दस्तावेज हमारे पास उपलब्ध है)