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दमन का हथियार या खतरा

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। हिजाब को जन स्थान, पब्लिक स्पेस पर किसका कब्जा रहेगा और अन्य उसी की शर्तों पर रह सकता है। कपड़े, भोजन में थाली और अलमारी में किस किताब को रखना है इन तीन चीजों पर हमारे देश में कुछ साल से एक ताकत जबरदस्ती कर रही है और इस खतरे को हमें धर्म की चश्मे से ऊपर उठकर देखना होगा। एक धर्म वालों को राजनैतिक तौर पर गोल बंद करके दूसरे धर्म से डराया जा रहा है। कभी ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले 3 शब्द कह कर अपने औरतों को छोड़ देने वाले दार्शनिक तरीके से इसे समझें इसे अदरिंग कहा जाता है । धर्म, लिंग, सामाजिक, आर्थिक स्थिति के कारण लोगों के प्रति पूर्वाग्रह हिजाब पहनने या न पहने दोनों ही मामले में औरतें राजनीतिक हथियार बनी, उनकी स्वयं की चुनने की आजादी खतरे में है भारत में धार्मिक मामले संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27, 28 से जुड़े हुए हैं और कोई भी मामला इन्हीं 4 अनच्छेद के अंदर सुना जाएगा। राइट टू रिलीजन कितनी छूट देगा और कहां पर राजदंड नियम बना सकता है यह भी संविधान ही तय करेगा ऐसे में हिजाब के मुकाबले गेरुआ दुपट्टा प्रयोग ही नासमझी भरा है। हर धर्म में उसे मानने वाले परंपरागत रूप से जिन चिन्हों को लेकर चल सकते हैं उनके बारे में बहुत ज्यादा विवाद नहीं है ऐसे में न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा और उसके पहले विभिन्न अधिवक्ताओं की बहस देश को सही दिशा में ले जाने वाली साबित होगी हमें इंतजार रहेगा।