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आदत है प्रधानमंत्री की आधी जानकारी देते हैं, गोवा की स्वतंत्रता को जाने उचित स्रोत से ...
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । भारतीय परंपरा में आप्त वचन ज्ञान देने का विश्वसनीय तरीका माना जाता था। बहुत समय तक गुरुओं ने इसी तरीके से अपनी जानकारी आगे बढ़ाएं बाद में लिखने की बारी आई कालांतर में गुरु हमेशा सही जानकारी ही देगा यह जरूरी नहीं था, ऐसे में जिन्हें जानकारी चाहिए उन्होंने आप्त वचनों को अन्य कसौटी पर जांचना प्रारंभ किया यह बात वर्तमान दौर में भी सत्य है। पहले मंत्री, नेता सदन के अंदर जो बोले थे उस पर आंख मूंदकर विश्वास किया जा सकता था किंतु आजकल ऐसा नहीं है इसी तारतम्य हाल ही में एक स्थान पर देश के प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को गोवा के स्वतंत्रता के संदर्भ में दोषी ठहराया। भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ और गोवा 18 दिसंबर 1961 को, देश के वर्तमान प्रधानमंत्री ने कहा 16 साल का अंतर क्यों दोषी कौन.....? उन्हें अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि प्यारी थी अन्यथा गोवा 1947 में ही स्वतंत्र होता यहां पर यह समझना जरूरी है कि भारत में केवल अंग्रेजों का शासन नहीं था कुछ भू-भाग पर पुर्तगाली का शासन था और कुछ स्वतंत्र रियासत थी इस लिहाज से गोवा दमन द्वीप पांडुचेरी को रियासत के लेवल पर नहीं देखा जा सकता गोवा पर पुर्तगालियों का शासन था और पुर्तगाल नेटो का सदस्य देश नेटो संगठन में अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस और यूरोपीय देश हैं उस समय शीत युद्ध की स्थिति थी भारत एक नवोदित राष्ट्रीय था ऐसे में 1947 में ही गोवा पर ना तो कब्जा हो सकता था ना ही विलय जैसा की रियासतों के साथ हुआ 1961,17 दिसंबर को भारतीय सेना ने गोवा पर कार्यवाही की और 1500 वर्ग मील के क्षेत्र को पुर्तगाली उपनिवेश से मुक्त कराया 17 दिसंबर को रूस के राष्ट्रपति बौरीस बौरो शिलोब दिल्ली में थे और उन्होंने भारतीय कार्यवाही का समर्थन किया ऐसे में नेटो देशों ने गोवा पर भारतीय सेना की कार्यवाही के खिलाफ भारत के ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया इस तथ्य को छोड़कर प्रधानमंत्री अन्य प्रकार की जानकारी परोस रहे हैं रियासतों का विलय और विदेशी उपनिवेश को एक तराजू पर नहीं रखा जा सकता ना कानूनी रूप से ना संप्रभुता की दृष्टि से ऐसे मे आप्त वचनों पर भरोसा ना करके समकालीन इतिहास स्वयं पढ़ना ही और सही स्रोत से पढ़ना उचित होगा ।


