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ताइक्वांडो और रामपुरी एक ही सिक्के के दो पहलू
- By 24hnbc --
- Friday, 07 Jan, 2022
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। बिलासपुर में एकल खेल को संस्थागत रूप देने का सबसे पुराना प्रयास जिला ताइक्वांडो संघ रामपुरी गोस्वामी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। ताइकांडो के वर्तमान स्वरूप को देखकर भले ही आम आदमी उनकी सफलता से ईर्ष्या कर ले किंतु ताइक्वांडो खेल को उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दे दी। 1990 में रामपुरी ने ताइकांडो को अपना कैरियर बनाया और इसे समिति का रूप देते हुए जिला ताइक्वांडो संघ की स्थापना की, उनके पहले अध्यक्ष अब जन्नतनसीह हो चुके शेख गफ्फार जी थे तभी रामपुरी जी ने नागोराव शेष स्कूल प्रांगण में प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया कुछ ही दिन बाद लड़कियों को एमएलबी शाला में प्रशिक्षण सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जाने लगे । 1997 में खेल संगठन ने छत्तीसगढ़ स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन करना प्रारंभ कर दिया था उनकी स्पष्ट सोच थी कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना में आए उसके पहले ही इस स्तर के खेल आयोजन प्रारंभ हो जाएं। 29 अगस्त 2000 में इस खेल संगठन को राष्ट्रीय ताइक्वांडो संघ से एफीलेशन प्राप्त हो गया खेल संगठन की विश्वसनीयता को इन नामों से ही पहचान प्राप्त हो जाती है । एलके पांडे जिन्हें जिले का श्रेष्ठ कॉमेंटेटर माना जाता है इस खेल संगठन से जुड़े थे डी महेश बाबू, अंजू सिंह बघेल एसपी दुबे, हर्षमंदिर, शैलेंद्र श्रीवास्तव, एसआरपी कल्लूरी, केके गर्ग जैसे आईएएस आईपीएस ताइकांडो के इस खेल संगठन से जुड़े रहे रामपुरी गोस्वामी ने बिलासपुर के ताइकांडो खिलाड़ियों को देश के विभिन्न शहरों में प्रोफॉर्म करवाया है जिनमें बैंगलोर, पुणे, जम्मू, चेन्नई, तिरुअनंतपुरम, हैदराबाद, अमृतसर , चंडीगढ़, मणिपुर, असम , भुवनेश्वर, पटना, रांची, और निश्चित ही देश की राजधानी दिल्ली इसमें शामिल है। बातचीत में रामपुरी में बताया कि उनके द्वारा प्रशिक्षित किए गए 200 से 300 लोग विभिन्न सुरक्षा संस्थानों की सेवा कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में जब से उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय नौकरी में प्राथमिकता मिलने लगी तब खाद्य विभाग, पुलिस, शिक्षा जैसे विभागों में ताइकांडो से सीखे हुए लोगों को नौकरी मिली है। इस खेल में महिला कोच की कमी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब परंपरागत सोच टूट रही है और लड़कियां विवाह के पूर्व और कुछ तो विवाह के बाद भी कोच बनने को तैयार हो रही है। पहले सिखाने के लिए यदि बच्चे के माता-पिता ने 50 या ₹100 दे दिया तो बड़ी बात होती थी और इसे वेतन नहीं इनाम समझना चाहिए और आज 1-1 कोच खिलाड़ी को तैयार करने के लिए ₹20000 से लेकर ₹100000 तक लेते हैं । ताइकांडो में बेल्ट के स्तर को समझाते हुए उन्होंने बताया कि एलो, ग्रीन, ग्रीन वन, ब्लू, रेड, रेड वन, ब्लैक जैसे बेल्ट होते हैं। ब्लैक बेल्ट आज भी साउथ कोरिया से ही पंजीकृत होने पर ही मिलता है उन्होंने स्वयं 1988 में बुरहानपुर अब मध्यप्रदेश में ताइकांडो से जुड़कर परीक्षा पास की उन्होंने बताया कि ताइकांडो अपने आप में व्यक्तित्व निर्माण का पूर्ण पाठ है। सहनशक्ति विपरीत परिस्थिति में भी शांत रहना जैसे गुणों का विकास इस खेल पद्धति से अपने आप होता है हाल ही में बिलासपुर में 16 वीं राज्यस्तरीय प्रतियोगिता आयोजित हुई उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 44 खेल संगठन है और प्रदेश में 48 खेल संगठन ऐसे हैं जो ओलंपिक खेलों को फालो कर चल रहे हैं। ताइक्वांडो को 2010 में खेल नीति के अनुसार केएसके पावर प्लांट को दिया गया था किंतु यह नीति सफल नहीं हुई और फिलहाल खेल अलग-अलग निजी क्षेत्र की कंपनियों को नहीं सौंपा गए हैं। फिर भी बिलासपुर जिला प्रशासन का विशेष धन्यवाद है कि ताइकांडो के लिए उनके मन में विशेष स्थान है।


