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यह तो होना ही था

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी के मैदान में जब आप खेलोगे तो यह तो होना ही था। देश में इन दिनों जिस तरह का माहौल कुछ लोग अपने आका के इशारे पर बना रहे हैं उससे छत्तीसगढ़ अछूता रह जाए ऐसा हो नहीं सकता। दूसरी ओर कुछ लोग इस प्रयास में हैं कि उन्हीं के तरीकों से उनका मुकाबला किया जाए तो वे गलती कर रहे हैं। सब जानते हैं भगवा की राजनीति में भाजपा की विशेषज्ञता है और आप जब उन्हीं के मैदान पर खेलोगे तो जो रायपुर की धर्म संसद में हुआ वह तो होना ही था इसी वर्ष सबसे पहले कवर्धा को भगवा की नई प्रयोगशाला बनाया गया और भाजपा का खेल छत्तीसगढ़ में शुरू हुआ जाने किसके दिमाग की उपज था कि भगवा को रोकने के लिए भगवा ही खेलने गए शायद यह जंगल के विशेषज्ञ हैं जहां एक आग को रोकने के लिए दूसरी आग लगाई जाती है कभी-कभी इस खेल में पूरा जंगल नष्ट हो जाता है यहां पर यह कहना जरूरी है कि कई माध्यमों से 5 - 6 साल पूर्व से ही लोगों के दिमाग में जानबूझकर कुछ संकेत डाले जाते हैं याद करें ओ माय गॉड में भाजपा के सांसद परेश रावल का कथन की धर्म से या तो कायर पैदा होते हैं या आतंकवादी असल में यह डायलॉग अपने आप में गलत है कायरता और आतंकवादी एक ही तरह के लोग हैं दोनों के मूल में साहस नहीं होता डर होता है। कायर व्यक्ति के मन में भी डर होता है और आतंकवादी के मन में भी डर होता है तभी तो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा नहीं करते सनातन धर्म आज यदि सनातन है तो अपने मूल विचारों के कारण दया, भाईचारा, वासुदेव कुटुंबकम की भावना ना कि म्यान से तलवार निकाल कर मारकाट के कारण रायपुर की धर्म संसद का आयोजक मुख्य संरक्षक कोई भी रहा हो किंतु गांधी को पोसने वाले अपना खेल कर गए कम ही लोग यह समझते हैं कि मोहनदास करमचंद गांधी ने हमेशा सनातन धर्म को साथ रखकर ही स्वतंत्रता संग्राम का पूरा आंदोलन चलाया साथ ही उन्होंने अन्य धर्मो का भी सहयोग लिया तभी तो उन्हें लोग साबरमती का संत कहते हैं अंतर सिर्फ इतना है कि गांधीजी ने बदन पर कभी भगवा नहीं ओढ़ा बल्कि उनके वस्त्र श्वेत होते थे मन भी काला नहीं था। अब वक्त बदल चुका है बदन पर श्वेत हो या भगवा मन तो अधिकतर के काले हैं अभी समाज को जरूरत है ऐसे लोगों की जो देश के निर्माण में नागरिकों के हित में देश के संविधान को आगे रखे संवैधानिक राष्ट्रवाद ही श्रेष्ठ मार्ग है और इस पर चलकर ही देश के नागरिकों का अस्तित्व है।