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राहुल शर्मा मामले में नई जांच टीम को भी हुआ 1 साल 1 माह

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल जी के निर्देश पर पुरानी फाइल तो खुल जाती है पर उन पर परिणाम आता नहीं दिखता एक ऐसा ही मामला 2002 बैच के आईपीएस राहुल शर्मा आत्महत्या कांड क्लोजर रिपोर्ट सीबीआई का है ।14 नवंबर 2020 को सीएम के निर्देश पर गृह विभाग के उप सचिव मुकुंद गजभिए ने जांच समिति बनाई जिसका नेतृत्व आईपीएस डीजी जेल संजय पिल्ले कर रहे हैं टीम के अन्य सदस्य दीपांशु काबरा, रतनलाल डांगी, प्रशांत अग्रवाल सभी आईपीएस तथा एक एएसपी अर्चना झा है। अब तो फाइल खोलें 1 वर्ष 1 महीने के लगभग होने जा रहा है अब तक इस मामले में जांच कहां तक पहुंची कोई बताने को तैयार नहीं होता राहुल शर्मा आईपीएस 2002 ने 12 मार्च 2012 को राहुल शर्मा का मृत शरीर बिलासपुर ऑफिसर्स मेस में मिला । बताया गया कि उन्होंने अपनी सर्विस रिवाल्वर से स्वयं को गोली मार ली एक सुसाइड नोट भी मिला जिसमें लिखा था कि आई एम जस्ट सिक एंड फ्रेडअप दी लाइफ सच एज इन्टरफेरींग बास एण्ड सच ऐज एगोरेजं एण्ड होटीजज, दी बोथ रूड माय पीस ऑफ माइंड डिस्टरबिंग माय फैमिली आई जूज डेथ ओवर डिस ग्रेस एण्ड हम्युलेशन इस के बाद छत्तीसगढ़ की सरकार पर दबाव बढ़ा डॉ रमन सिंह को कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक रविंद्र चौबे ने विधानसभा में खूब घेरा आदतन डॉक्टर रमन ने सीबीआई जांच के लिए नोटिफिकेशन जारी करा दिया। सीबीआई को भी कुछ हाथ नहीं लगा आखिर में विशेष न्यायाधीश सीबीआई की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दे दी गई इस मामले में राहुल शर्मा के पिता ने बिलासपुर हाई कोर्ट में एक रिट पिटिशन भी दायर किया था इसी संदर्भ में उस वक्त के सीबीआई, जज प्रभाकर ग्वाल जो अब न्यायिक सेवा से बर्खास्त हैं ने अपनी पुस्तक में भी काफी कुछ लिखा है पूरे मामले में जीपी सिंह और हाई कोर्ट के जस्टिस अग्निहोत्री का नाम बार-बार उछला था नियम तो यह कहते थे कि दोनों व अन्य का धारा 27 साक्ष्य अधिनियम के तहत मेमोरेंडम कथन लिया जाता पर ऐसा नहीं हुआ यह किसके कहने पर हुआ यह भी जांच का प्रश्न है। जीपी सिंह के ऊपर हाल ही में एसीबी की कार्यवाही हुई वह गिरफ्तारी से बचने सुप्रीम कोर्ट तक गए किंतु राहुल शर्मा के मसले पर इस दौरान एक बार भी ना तो लिखा गया ना ही जांच समिति ने जीपी सिंह पर दबाव बनाया अब तो उनकी जबरिया सेवानिवृत्ति भी होने वाली है राहुल शर्मा बिलासपुर एसपी के पूर्व रायगढ़ में पदस्थ थे और 6 जनवरी 2012 को रायगढ़ से बिलासपुर तबादला हुए थे थोड़े से ही समय में उन्होंने बिलासपुर के नागरिकों के मन में एक सकारात्मक पुलिस अधिकारी की छवि बना ली थी बिलासपुर पुलिस ऑफिसर्स मेस और सिविल लाइन थाने के बीच की दूरी बहुत कम है पैदल भी मुश्किल से 3 मिनट का रास्ता है किंतु सिविल लाइन से मेस पहुंचने में उस समय के सीएसपी सिरमोर को 15 मिनट से अधिक का वक्त लगा था जीपी सिंह के अतिरिक्त इनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में थी बिलासपुर एसपी राहुल शर्मा की पत्नी क्योंकि इंडियन रेलवे की बड़ी अधिकारी थी इसलिए दोनों ने अपना आवास रेलवे क्षेत्र में ही रखा था ड्यूटी में आसानी रहे इस कारण राहुल शर्मा अपना काफी सामान मेस में रखते थे इस हादसे में उनका लैपटॉप भी गायब हुआ कुल मिलाकर संकेत यही जाते हैं कि उच्च राज्यनैतिक हस्तक्षेप वाले मामलों में जांचें निष्पक्ष नहीं होती हालांकि अभी भी नई जांच टीम से कुछ अपेक्षाएं तो है ही।