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लोकतंत्र के इन 3 सालों में गायब है जवाबदेही का आधार

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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । देश को आजाद हुए 70 वर्षों से ज्यादा हो गया है किंतु लोकतंत्र में जवाबदेही की खस्ता हालत जितनी इन दिनों है ऐसी पूर्व में कभी नहीं हुई पहले कहा जाता था कारबां लूटा क्यों तेरी राह बरी का सवाल है पर अब यह उपयुक्त नहीं है इस बार तो स्रोत ही रीत गया है जब स्रोत ही रीत जाए तो सवाल किससे किया जाए ..... भारतीय जनता पार्टी के इस शासनकाल में लोकसभा में उनकी सदस्यता का आंकड़ा 300 से ऊपर है, देश की लोकसभा में कुल सीट संख्या 543 है, देश में 28 राज्यों में से 17 में भारतीय जनता पार्टी का शासन है, कुल विधानसभा की सदस्य संख्या 4036 है जिसमें से भारतीय जनता पार्टी के सदस्य 1035 हैं। अब सवाल उठता है लोकतंत्र के सबसे आवश्यक तत्व जवाबदेही का जवाबदेही जिनकी बनती है वह केवल राजनीति कर रहे हैं उनमें से पहला नाम देश के गृहमंत्री का है पूर्वोत्तर के 7 राज्य आपस में सीमा विवाद को लेकर जिस तरह लड़ते हैं क्या उसकी जवाबदारी, जवाबदेही गृहमंत्री की नहीं बनती पश्चिम यूपी का जिम्मा इन दिनों गृहमंत्री के पास ही हैं मथुरा में नारायणी सेवा ने जिस तरह के वक्तव्य जारी किए हैं क्या उसकी जिम्मेदारी गृहमंत्री पर नहीं आती। नागालैंड, असम के बीच में जिस तरह से एफआईआर दर्ज हुई हैं क्या नहीं लगता कि गृहमंत्री को जवाबदेही का जवाब देना चाहिए। 2014 में देश के प्रधानमंत्री ने ही कहा था कि वोडों समस्या का हल हो गया है पर इन दिनों नागालैंड में जो हालात हैं क्या उससे लगता है कि समस्या का हल हो गया है या जिस दिन पीएम ने हल्की घोषणा की थी उस दिन से समस्या शुरू हो गई थी इस राज्य के मोन जिले पर गृहमंत्री मौन क्यों हैं । पूर्वोत्तर से हटकर जम्मू कश्मीर पर देखे तो पहले नोटबंदी से आतंकवाद खत्म होगा ना होने पर 370 से समाप्त होगा 370 हटे पर्याप्त माह बीत चुके हैं किंतु परिणाम यह है कि गुपचुप बेचने वाला भी सुरक्षित नहीं है जिस राज्य में गुपचुप का ठेला सुरक्षित न हो तो शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा। 370 हटा देने से कश्मीर स्वर्ग बनेगा किंतु 40 साल के इतिहास में पहला अवसर है जब आम मजदूर भी कश्मीर से पलायन कर रहा है। मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रीत्व कार्यकाल को याद करें और उस समय के गृहमंत्री शिवराज पाटिल के इस्तीफे को याद करें और अब याद करें ट्रंप के जाते ही दिल्ली के दंगों को दंगों के पीछे भाजपा के तीन सांसदों की भूमिका जिस तरह खुल्लम-खुल्ला दिखाई देती थी किंतु जांच के दायरे में एक नहीं आया तब क्या गृहमंत्री पॉलिटिक्स करना बंद कर देंगे ..... असल में मंत्री बनने के बाद उन्होंने कभी पॉलिटिक्स बंद ही नहीं किया शाहीन बाग का आंदोलन हो या किसान आंदोलन जवाबदेही भारतीय जनता पार्टी के स्वभाव में ही नहीं है तभी तो इनके मुखिया कभी किसी से ना इस्तीफा मांगते हैं और नैतिकता की तो बात ही मत करें उसके आधार पर इस्तीफा वही देता है जिस की नैतिकता जिंदा होती है।