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रोजगार बचाएं ढूंढे या लव जिहाद की रैली में जाएं आम आदमी एक परेशानियां अनेक
- By 24hnbc --
- Sunday, 05 Sep, 2021
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समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । शांत छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और लव जिहाद को लेकर अचानक सक्रियता बढ़ गई है और इस सक्रियता में विपक्षी भाजपा के साथ आर एस एस के अनुषांगिक संगठन एक होकर लड़ते दिखाई दे रहे हैं इस तरह के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं वह एक के बाद एक लगातार आयोजित होने की जानकारी है। बिलासपुर शहर के अग्रसेन चौक पर एक बैनर सबका ध्यान खींच रहा है इसमें सनातनी हिंदू धर्म के आवाहन पर 7 सितंबर को धर्मांतरण और लव जिहाद के विरोध में रैली आयोजित होने की सूचना है इतना ही नहीं ड्रेस कोड के साथ उपस्थित होने का आवाहन है इन दिनों जब देश के कुछ नेता वस्त्रों के रंग से धर्म के पहचानने का दावा करने लगे हैं। तब सनातन धर्म अपनी रैली में युवाओं को भगवा रंग और महिलाओं को पीली साड़ी के साथ बुलाता है पूरे देश का किसान हरे रंग का पगडा, साफा टोपी पहन कर 1 साल से केंद्र सरकार के कृषि कानूनों का विरोध कर रहा है कुछ लोगों की नजर में हरा रंग इस्लाम का प्रतीक है । राष्ट्रीय झंडे में हरा रंग खेती किसानी का प्रतीक है भारतीय दर्शन में रंगों को इस तरह समझा गया है कि पीला रंग आध्यात्मिकता के प्रति जागरूकता दिखाता है। भगवा रंग ज्ञान और सन्यास का प्रतीक है ऐसे में रैली में आने वाला क्या हर युवा सन्यास की ओर जाता माना जाए! और पीला रंग पहनकर आने वाली महिलाएं सभी को आध्यात्मिकता के प्रति समर्पित माना जाए इन दिनों जब देश की आर्थिक स्थिति डामाडोल है जिस देश में 70 साल से कुछ नहीं हुआ का दावा करने वाले देश की संपत्तियों को बेचकर 80 बिलियन डॉलर जुटाने की योजना चला रहे हैं। पेट्रोल पंप पर रोज पेट्रोल लेते समय जुबान से अपशब्द निकाल रहे हैं किराना दुकानों से तेल खरीदते समय गर्दन का पसीना एड़ी से निकल जाता है काली मिर्च से लेकर दालचीनी तक महंगी हुई पड़ी है तब गृहस्थी की गाड़ी खींचना कितना कठिन है और कुछ संगठनों को धर्मांतरण और लव जिहाद दिखाई दे रहा है। युवा इन दिनों ना मिलने वाले रोजगार से परेशान हैं एक ही साल में 16 लाख लोगों की नौकरियां चले जाने का समाचार पढ़ना पड़ता है तब कैसे विश्वास करें कि परिवार के प्रति समर्पित युवाओं के बीच लव जिहाद जैसी अवस्था भी चल रही होगी धर्मांतरण का विवाद छत्तीसगढ़ में कोई नया नहीं है दशक हो गए एक विचारधारा जंगलों में सेवा कर रही है और दूसरी विचारधारा घर वापसी की बात करती है शासन किसी का रहा हो यह दोनों चीज एक साथ चलती रही जब कभी भाजपा शासन में आई तो धर्मांतरण रुका नहीं और जब कांग्रेस का शासन हुआ तो भाजपा सहित उसके अनुषांगिक संगठनों ने धर्मांतरण का मुद्दा उठाया जनता अपने रोजमर्रा के कामों पर ध्यान दें सरकारी दफ्तरों में बढ़ रहे भ्रष्टाचार से निपटे बेरोजगारी के दौर में काम ढूंढे जिन्हें काम मिला है वह अपने रोजगार को बचाएं इसके बाद पीला कपड़ा और भगवा रंग पहनकर जागो हिंदू जागो अभी नहीं तो कभी नहीं की रैली में शामिल होकर इनका राजनैतिक स्वार्थ सिद्ध करें फैसला आम आदमी को करना है।


