No icon

24hnbc

रविवार को बैठक सीजे दीया स्थगन, छुट्टी के दिन नहीं आये डॉक्टर सिम्स में बच्ची की मौत

24hnbc.com
समाचार - बिलासपुर
बिलासपुर । 5 सितंबर दिन रविवार को न्याय धानी कहे जाने वाले बिलासपुर में समाज के दो बुद्धिजीवी कहे जाने वाले लोगों की दो अलग-अलग चेहरे दिखे दोनों को आदमी समाज में ईश्वर तुल्य होने की उपाधि दी जाती है।पहले एक अच्छी खबर पर चर्चा करें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा जी ने महासमुंद जिले के बागबाहरा क्षेत्र के ग्राम तेंदुकोना में बनी दुकानों के तोड़े जाने पर रोक लगा दी पीड़ित व्यवसायी के अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने प्रकरण की गंभीरता को लेते हुए इसे रविवार के दिन ही सुनने की व्यवस्था की और स्थगन आदेश जारी किया। अब दूसरी चर्चा करें रविवार के ही दिन शहर से लगे हुए एक ग्रामीण क्षेत्र की 10 साल की बच्ची को सांप ने काट खाया पीड़ित माता-पिता बिना किसी झाड़ फूंक कराएं समय की अहमियत को देखते हुए सुबह 6:00 बजे ही किराए का वाहन लेकर सिम्स पहुंच गए। उल्लेखनीय है कि सिम्स कई करोड़ की लागत से बना है सरकारी मेडिकल कॉलेज है और समय-समय पर मंत्री से लेकर विधायक, एनटीपीसी, एसईसीएल सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत लाखों रुपए देकर इस संस्थान की मदद करते हैं बच्ची अस्पताल पहुंची ढाई घंटे तक उसे किसी डॉक्टर ने अटेंड नहीं किया उसका प्राथमिक उपचार भी नहीं हो सका रविवार का दिन होने के कारण सिम्स के एमएस डॉ पुनीत भारद्वाज ने मोबाइल अटेंड नहीं किया। सब बातों का परिणाम बच्ची की जीवनलीला समाप्त हो गई डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए कागजों पर ब्रॉडडेड लिख दिया जिसका अर्थ यह है कि जब मरीज अस्पताल लाया गया वह मृत अवस्था में था।
एक तरफ हमारी न्याय व्यवस्था है जहां पर आवश्यक होने पर रविवार को भी अदालत खुल जाती है और दूसरी ओर सातों दिन चौबीसों घंटे काम करने वाला मेडिकल कॉलेज का डॉक्टर या स्टॉप एक 10 साल की बच्ची जिसे सांप ने काटा है उसके माता-पिता मेडिकल साइंस पर भरोसा करके बिना झाड़-फूंक, बिना बैगा गुनिया सीधे अस्पताल आते हैं और उन्हें इलाज नहीं मिलती।