No icon

24hnbc

अस्पताल एक धंधे अनेक प्रथम किस्त

24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर। हम इस शीर्षक के अंतर्गत बिलासपुर के गौरवशाली इतिहास में दर्ज मिशन हॉस्पिटल की चर्चा करेंगे। सबसे पहले यह समझते हैं कि मिशन अस्पताल बिलासपुर के इतिहास में गौरवशाली कैसे हैं। इस अस्पताल ने 1885 से जनसेवा का कार्य शुरू किया है और आंखों देखी प्रत्यक्ष रूप से पाई गई जानकारी से इस अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी और ओटी 2016- 17 तक कार्यशील रहे किंतु इसके बाद इस अस्पताल के बुरे दिन शुरू हो गए एक-एक करके बड़े नामी-गिरामी चिकित्सकों ने अस्पताल को अपनी सेवा देना बंद कर दिया। अब इस अस्पताल में मरीज से अधिक एमआर देखे जाते हैं वे भी एक ऐसी महिला रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से मिलने आते हैं जो दरअसल सिम्स की सेवा में है और मिशन अस्पताल की ओपीडी में निजी केस देखने बैठती है एक अन्य चिकित्सक जो इसी चिकित्सक के पति हैं शिशु रोग विशेषज्ञ हैं ऐसे में स्पष्ट समझा जा सकता है कि 2 डॉक्टर के भरोसे इतने बड़े अस्पताल की ओपीडी संचालित नहीं की जा सकती वर्ष 2020 और 21 के लॉकडाउन में इस अस्पताल ने अपने दरवाजे आपदा प्रबंधन अधिनियम का बोर्ड लगाते हुए खूब बंद रखें जिसका सीधा सा अर्थ था अस्पताल ही बंद था। मिशन अस्पताल के ओपीडी, इमरजेंसी एवं अन्य सेवा क्षेत्र को लेकर विभाग स्पष्ट जानकारी देने से हमेशा बचता है जब बिलासपुर के हर छोटे-बड़े अस्पताल में कोरोन पॉजिटिव प्रकरण के लिए दरवाजा खोलना जिला प्रशासन तय कर रहा था तब इसी जिला प्रशासन ने मिशन अस्पताल को इस लायक भी नहीं माना कि इसमें अस्पताल तो दूर आइसोलेशन वार्ड ही बना दिया जाए, अस्पताल बंद है किंतु अस्पताल परिसर में रोज विश्वासी मंदिर में सैकड़ों की संख्या में भक्त तो अस्पताल का पहला धंधा विश्वासी मंदिर है।