बेरोजगारी के दौर में कैसे पैदा हुए सैकड़ों पत्रकार
बिलासपुर प्रेस क्लब संदर्भ - 4
- By 24hnbc --
- Thursday, 22 Jul, 2021
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बिलासपुर बिलासपुर प्रेस क्लब पंजीयन क्रमांक 15662 में अविभाजित मध्यप्रदेश के ठीक पहले 100 से कम सदस्य थे। प्रत्येक 2 वर्ष में होने वाले चुनाव को कैसे जीता जाए इसका फार्मूला सदस्य संख्या बढ़ाने में ढूंढा गया हर 2 साल में जो भी प्रेस क्लब पदाधिकारी होता था वह इतना असंतोष पैदा कर लेता था कि दोबारा जीतने के लिए उसे नए मतदाताओं की जरूरत होती थी। शहर की सक्रिय पत्रकारिता में जो युवा जूझते रहते थे वह सदस्य बनने के लिए किसी की गुलामी पसंद नहीं करते थे ऐसे में वोट मुझे ही मिले तो मैंने अपने परिचितों को संस्था का सदस्य बनाना प्रारंभ किया ऐसे में प्रश्न उठता है कि प्रेस क्लब बिलासपुर का सदस्य होने मात्र से क्या व्यक्ति पत्रकार हो जाएगा या संस्था का यह दायित्व है कि वह पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्ति को ही सदस्यता प्रदान करें यही कारण है कि धीरे धीरे प्रत्येक अध्यक्ष हर 2 साल में 40 से 60 नए लोगों को सदस्यता देता गया भले ही वह पत्रकार हो या नहीं संस्था के विधान के अनुसार दैनिक अखबार और साप्ताहिक अखबार में कार्यरत को ही प्रेस क्लब बिलासपुर की सदस्यता दी जा सकती है। संस्था के गठन के पश्चात पत्रकारिता के क्षेत्र में कई परिवर्तन हुए किंतु माननीय पदाधिकारियों ने कभी भी संस्था के बाइलॉज को बदलना जरूरी नहीं समझा और नियमों को ताक पर रखकर मर्जी से सदस्यता देनी प्रारंभ की यही कारण है कि आज शहर में दर्जनभर ऐसे युवा हैं जो पत्रकारिता के क्षेत्र में गंभीरता से काम करते हैं किंतु लाख प्रयासों के बाद भी बिलासपुर प्रेस क्लब की सदस्यता प्राप्त नहीं कर सकते । वहीं दूसरी ओर कई पान वाले, नरियल वाले, मोटर मैकेनिक, जमीन दलाल, कबाड़ व्यवसाई, बिजली मिस्त्री और यहां तक की सरकारी नौकरी करने वाला भी इस संस्था का सदस्य बन गया और अब संस्था की सदस्य संख्या 450 है। बिलासपुर के दैनिक अखबारों में कार्यरत पत्रकारों को अब इस बात का दुख सताता है कि उन्होंने समय पर सदस्यता के मापदंड तय किए होते तो आज यह विकट स्थिति ना होती इस चुनाव में भी 25 से 30 सदस्य संस्था का चुनाव लड़ रहे हैं किंतु किसी ने भी सदस्यता के नियम और नियमों को पूरा न करने के बाद भी सदस्यता प्राप्त कर चुके मतदाताओं को बाहर का रास्ता दिखाने के बारे में कोई घोषणा की है ऐसे में सहज माना जा सकता है कि संस्था में आने वाला वक्त भी सफाई अभियान में तब्दील नहीं होगा ।


