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दिल्ली में स्वतंत्र, तो बिलासपुर में राम सिंह नाम ही बदलता है काम नहीं

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बिलासपुर, 5 सितंबर 2026। 
प्राइवेट आर्मी से खतरा हर जगह है दिल्ली में उसका नाम स्वतंत्र भारतद्वाज है तो बिलासपुर में राम सिंह। स्वतंत्रता का इंटरव्यू यदि दिल्ली में एनआईए लेता है तो राम सिंह का इंटरव्यू रायपुर में लिया जा रहा है। जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं ने सत्ता के सामने सरेंडर किया है लोकतंत्र की परिभाषा ही बदल गई लगता है नई परिभाषा गुंडों के द्वारा, गुंडों के लिए, गुंडों की सरकार जब कभी भी देश के करोड़ शिक्षित बेरोजगार अपने लिए नौकरी पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था के बारे में जवाबदेही की बात लेकर सरकार से कुछ पूछते हैं यह कथित निजी आर्मी आंदोलनकारीयो को भयभीत करने के लिए दंडा चलती है। दिल्ली में यही हुआ। दिल्ली पुलिस जिसका नियंत्रण केंद्र के गृहमंत्री के पास है भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों की पुलिस के लिए क्या रोल मॉडल बन रही है वह बता रही है कि कैसे लिस्टेड अपराधियों का उपयोग आंदोलन के दौरान अवस्था फैलाने में किया जाए ।
छत्तीसगढ़ में जहां एक ओर भूमिगत खनिज का निजीकरण हो रहा है अधोसंरचना के काम पीपीपी मॉडल पर दिए जा रहे हैं स्वास्थ्य और शिक्षा भी पूरी तरह से निजीकरण के शिकंजे में हैं। सरकारी नौकरी के हजारों पद रिक्त होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं की जा रही है रोज शिक्षक अलग-अलग मंत्री के घर पर प्रदर्शन करते हैं और बदले में उन्हें टालू जवाब मिलते हैं ऐसे में राम सिंह और स्वतंत्र जैसे लोग मीडिया पर कहते हैं हमारा जलवा है और नेताओं के नाम के बाद यह बताते हैं कि फला-फला नेता उसका बड़ा भाई हैं। बिलासपुर जिले में जब कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में शांति मार्च निकलता है तो इस बात पर तुरंत ध्यान जाता है की जिन्हें मत देकर हमने अपना प्रतिनिधित्व दिया उसमें से एक भी नेता शांति मार्च में नहीं आता...।
कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के प्रयास का धन्यवाद दिया जाना चाहिए इसके बावजूद कि वह जानते हैं कि उनका तबादला कभी भी हो जाएगा। पर वे बिलासपुर के प्रति ईमानदार हैं पर यही ईमानदारी नागरिकों से वोट प्राप्त करने के बाद जनप्रतिनिधि के पास क्यों नहीं है। जबकि वे तबादला करके कहीं अन्य जगह नहीं जा सकते। उसे शांति मार्च में जिले का एक भी विधायक नहीं था। डिप्टी सीएम नहीं थे जिनका निवास यहीं पर है। सांसद महोदय नहीं थे, निर्वाचित जनप्रतिनिधि के नाम पर एक शहजादी कुरैशी का चेहरा ही वहां दिखाई दिया और दूसरा चेहरा आप पार्टी की नेता प्रियंका शुक्ला का दिखाई दिया। ऐसे में जनता अबकी बार वोट देते समय याद रखेगी की कौन-कौन विधायकों को बिलासपुर के अमन चैन से सरोकार नहीं है।