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ना रह सके अटल

जनाब थे किसके

24hnbc.com
बिलासपुर, 2 नवंबर 2025। 
मस्तूरी गोलीकांड में एक अहम पड़ाव आया कि दसवीं से भी काम पड़ा अकबर खान गिरफ्तार हो गया। कई साल तक यह जब बिलासपुर शहर के युवा आइकॉन बनाकर घूमते थे। जिसने कभी ठीक से स्कूल की शक्ल नहीं देखी उसका दबदबा कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक था। एक अन्य खबर की हमले का एक आरोपी रायपुर बंगले पर पनाह लिया था तो अपराध के हमाम में सब -------- है। हम कोई नई सूचना नहीं दे रहे हैं अकबर खान 2001 से कांग्रेस में जिस नेता के पीछलग्गु थे वो अब विधायक हैं कहा जाता था कि लोग जिनके होते हैं उसके नाम का एक चम्मच जेब में रखते हैं। पर ये जनाब तो स्वयं को उसका वफादार कहते थे और हम लिख नहीं सकते कि वफादारी चौपाइयां में किसकी पहचान है और वो वफादार बयान दे की उसने सुपारी का आदेश ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष नागेंद्र राय से ली। बात हजम नहीं होती। अपने आका से पूछे बिना जनाब ने यह निर्णय कैसे ले लिया इस बात की तो जांच होनी चाहिए। इतना ही नहीं जनाब का नाम एक चुनाव में मतदाता के अंगुली पर मतदान के पूर्व स्याही लगाने के लिए भी आया था। यह स्याही उसे समय के सत्ताधारी दल को लाभ देने के लिए बताई जाती है। छत्तीसगढ़ में भाजपा ने 15 साल ऐसे ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उपयोग करके चुनाव जीता कांग्रेस सत्ता के साथ-साथ जनाब का जलवा सिविल लाइन थाने के अंदर बैठकर स्थानीय कांग्रेस विधायक को अपशब्द कहने का हौसला भी था। इसके पास आतंक इतना की कांग्रेस में ही एक सच्चे कार्यकर्ता ने इसके दबाव में अपना जीवन खत्म कर लिया और ऐसा करने के पहले उसे समय के मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी थी। कुम्हार पर में एक युवक रहा करता था जो जनाब की ड्राइवरी करता था कहते हैं कि उसके नाम से बहुत से इकरारनामा थे उसने भी आत्महत्या कर ली। इस प्रकरण में जिन युवाओं का नाम है उनका संबंध कांग्रेस भाजपा दोनों से है। पर पूरे बिलासपुर में अकबर खान का नाम कांग्रेस के एक ही नेता से जोड़ा जाता रहा इस बार वह नाम गायब है क्या यह मैजिक है....?
           मस्तूरी गोलीकांड के पीछे कई धंधों का जिक्र है। एक धंधा छोड़कर यह वह धंधा हैं जिसमें सबसे ज्यादा नगदी का प्रवाह है, लेबर सप्लाई जिसके ऊपर हमला हुआ उनमें से एक बस एजेंट है और लेबर सप्लाई का काम बगैर बस के नहीं होता कोविड काल के डाटा इस बात के प्रमाण है की मजदूरी ब्लॉक से देश के विभिन्न राज्यों में जाते हैं और यह धंधा और असामाजिक तरीकों से ही चलता है। और इसे बगैर राजनीतिक संरक्षण के नहीं किया जा सकता तो वर्चस्व की लड़ाई वहां भी है। 
मस्तूरी क्षेत्र में लेबर सप्लाई भी झगड़ों का बड़ा कारण है इसकी चर्चा कोई नहीं कर रहा मस्तूरी गोली कांड की तीसरी प्रमुख बात की गोली कांड पर कांग्रेस या बीजेपी से किसी भी बड़े नेता का कोई बयान नहीं आया यह भी एक मैजिक है।