No icon

24hnbc

प्रदेश संगठन के यही हाल रहे तो, लोकसभा में कांग्रेस को दो से अधिक सीट पर जीत नहीं होगी हासिल

24hnbc.com
बिलासपुर, 20 नवंबर 2023।
सन् 2023 का यह विधानसभा चुनाव छत्तीसगढ़ के दो राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा के लिए विशेष मायने रखता था। पहली बार कांग्रेस पार्टी सत्ता में रहकर चुनाव लड़ रही थी। और दूसरी ओर पहली बार भाजपा विपक्ष में होकर चुनाव लड़ रही थी। आज कांग्रेस की चर्चा....
2003 के बाद कांग्रेस तीन बार विपक्षी राजनीतिक दल के रूप में चुनाव लड़ी 2018 का चुनाव जीतने के बाद उसके पास मौका था कि सत्ता में रहते हुए वह अपनी पार्टी के संगठन को मजबूती प्रदान करते क्या ऐसा हुआ....? जिस तरह से संगठन ने छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ा उससे एक बात साफ है पार्टी संघटनात्मक स्तर पर और मजबूत की जा सकती थी नियमों का पालन ज्यादा कड़े तरीके से कराया जा सकता था पर नहीं हुआ हमेशा की तरह पार्टी पदाधिकारी चाहे वह प्रदेश स्तर के हो, जिला स्तर के या ब्लॉक स्तर के अपनी मनमर्जी करते दिखाई दिए। कांग्रेस के फेडरल संगठनों ने भी अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभाई। बिलासपुर जिले के चुनाव में सेवा दल के कार्यकर्ता यदा-कदा ही दिखाई देते थे। प्रदेश महिला कांग्रेस की कमान जिसे मिला है वह राज्यसभा सदस्य भी हैं कांग्रेस के घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए जितना दिया गया उसके प्रचार प्रसार की भूमिका प्रदेश महिला कांग्रेस ने उतने प्रभावकारी तरीके से नहीं निभाई। युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारी दिए हुए निर्देश के विपरीत अपनी मनमर्जी करते दिखाई दिए। यही हाल युवा कांग्रेस का रहा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की जिद का परिणाम है युवा कांग्रेस में चुनाव होता है चुने गए प्रतिनिधि ही पदाधिकारी बनते हैं उसके बाद भी चुनाव के दौरान इनकी उपस्थिति प्रभावकारी नहीं दिखाई दी, कहा तो यहां तक जाता है की कुछ पदाधिकारी के बैकग्राउंड को देखते हुए प्रत्याशी ने उन्हें चुनाव से दूर रहने ही कह दिया। 
बिलासपुर जिले में जिला ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष को ही विधानसभा टिकट मिल गया वे नगर निगम से पार्षद हैं एम आई सी के सदस्य हैं उन्होंने अपना पूरा ध्यान अपनी विधानसभा में केंद्रित कर लिया। जिला ग्रामीण संगठन में यदि साल 6 महीने पूर्व किसी पूर्ण कालिक अध्यक्ष की घोषणा की जाती तो पार्टी संगठन बेहतर प्रदर्शन करता पर ऐसा नहीं हुआ। पार्टी प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने में ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कांग्रेस का कार्यालय अभी भी 1900 के अंकों में चल रहा है। चुनाव लड़ना प्रचार प्रसार करना पूरी तरह से डिजिटल होता जा रहा है ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के प्रत्याशी आधुनिक नहीं हुए पर संगठन है कि अपने पुराने ढर्रे पर है। और इसका सबसे बड़ा उदाहरण तब मिल जाता है जब जिला मुख्यालय पर पार्टी द्वारा कोई पत्रकार वार्ता की जाती है। चुनाव के दौरान एक बार भी संगठन स्तर पर ऐसी पत्रकार वार्ता नहीं हुई जिसे आदर्श माना जाए। यदि भूपेश बघेल जैसे सीएम जिन्हें संगठन का महत्व मालूम है के पूरे 5 साल के कार्यकाल के दौरान भी पार्टी संगठन मजबूत नहीं हुआ तो ऐसे संगठन के बल पर छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से दो से अधिक सीट जीत पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।