उपाध्यक्ष ही मस्तूरी में दिखा रहा अनुशासनहीनता
टिकट न मिलने के बावजूद, नहीं बैठे घर पार्टी की जीत के लिए कर रहे जतन
- By 24hnbc --
- Friday, 27 Oct, 2023
24hnbc.com
बिलासपुर, 28 अक्टूबर 2023।
कांग्रेस की दूसरी सूची में ही बिलासपुर जिले की मस्तूरी सीट के लिए अधिकृत प्रत्याशी का नाम जारी हो गया था। तत्काल असंतोष का भाव दिखाने के लिए एक अन्य दावेदार डॉक्टर प्रेमचंद जायसी के समर्थकों ने राजीव भवन तक प्रदर्शन किया। इसे समर्थकों का जायज गुस्सा माना जा सकता है। क्षेत्र में उसके बाद कुछ छुटपुट बैठकें भी हुई पर अब डॉक्टर जायसी ने मस्तूरी से नामांकन पत्र खरीदा है, वे कांग्रेस के संगठन में पिछले 4 साल से प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और इसी प्रोटोकॉल का लाभ लेकर उन्होंने अपनी राजनीतिक तस्वीर को खूब चमकदार बनाने की कोशिश की यदि टिकट नहीं मिली तब शांति से प्रत्याशी के पक्ष में काम करने के स्थान पर असंतुष्टों का जमावड़ा लगना क्या अनुशासनहीनता के दायरे में नहीं आता। इसी क्षेत्र से टिकट के एक अन्य दावेदार कमल सिंह डहेरिया भी थे। उन्होंने भी टिकट के लिए रायपुर से दिल्ली तक हर जगह संपर्क किया। अच्छे दावेदार हैं उच्च शिक्षित है क्षेत्र में उनके पढ़ायें छात्रों की संख्या हजारों में है। कारण शासकीय स्कूल में प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए हैं पत्नी महिला बाल विकास विभाग में कार्यरत है और आंगनवाड़ी परियोजना में हैं लिहाजा ना केवल मजबूत प्रत्याशी थे बल्कि जिताऊ भी थे। कहां जाता है कि कांग्रेस के जीत के पैमानों पर खरे भी थे, पर जो भी कारण हो टिकट नहीं मिली के बावजूद कांग्रेस की जीत के लिए लगे हुए हैं। बातचीत में वे कहते हैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस से सरकार की जरूरत है और प्रदेश के ऊपर केंद्र में इंडिया की जरूरत है। यही कारण है कोई आपसी मतभेद होगा भी तो एक तरफ रखकर भरोसे की सरकार और राहुल गांधी को केंद्र में बैठालना है।
कमल डहेरिया प्रदेश कांग्रेस के किसी भी संघटनात्मक पद पर नहीं है चाहते तो दो-चार बार प्रभावशाली प्रदर्शन कर घोषित प्रत्याशी की नाक में दम कर देते पर इस घटिया तौर तरीकों को छोड़ उन्होंने पार्टी समर्थन में स्वत: लग जाना बेहतर समझा। दूसरी ओर जांजगीर लोकसभा चुनाव का हारा हुआ प्रत्याशी जायसी जिसे कांग्रेस संगठन ने 5 साल में सब कुछ दिया बलौदाबाजार जिले में डीएमएफ में सदस्यता, संगठन में उपाध्यक्ष का पद काम करने का स्वतंत्र दायरा पर बदले में इन्होंने पार्टी को संकट में डालने का कोई मौका नहीं छोड़ा। किसानों को न्याय की बात करने वाले अपने ही संगठन के भीतर कब न्याय करेंगे।


