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कांग्रेस का एकमात्र मापदंड जीतने लायक चेहरा, पर खरी नहीं उतरी पहली सूची

कांग्रेस को चाहिए शेष विधानसभा सीट पर लोकसभा जीत की दृष्टि से घोषित करें प्रत्याशी

24hnbc.com
बिलासपुर, 15 अक्टूबर 2023।
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना मुहूर्त के साथ ही कांग्रेस की ओर से छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए पहली सूची जारी कर दी गई। इस सूची में खास बात यह है कि प्रथम चरण की 20 सीट में से 19 सीट पर प्रत्याशियों के नाम जारी हुए हैं। और एक सीट जगदलपुर के लिए खाली स्थान रखा गया है। 8 विधायकों के टिकट कट गए कल 30 नाम की पहली सूची में अब कांग्रेस के लिए शेष 60 सीट पर प्रत्याशियों का चयन पहले 30 की सूची के मुकाबले ज्यादा कठिन है।
 भूपेश मंत्री मंडल के किसी सदस्य को निराश नहीं किया गया है यह एक बड़ा जोखिम है। 30 की यह सूची में 8 विधायकों का नाम कटा है। साधारण सी बात है उनके प्रदर्शन से पार्टी हाई कमान संतुष्ट नहीं रहा होगा। तब पूरे मंत्री अच्छे हैं यह कहना अतिशयोक्ति है।
सब जानते हैं छत्तीसगढ़ भूपेश बघेल मंत्री मंडल के चार मंत्रियों का प्रदर्शन अपनी विधानसभा में तो कमजोर है ही वे जिस विभाग का कमान संभालते हैं उसके कामकाज से भी जनता खुश नहीं रही। जिसमें पहला नाम महिला बाल विकास मंत्री, दूसरा नाम स्थानीय निकाय मंत्री और तीसरा एजुकेशन है। इस सूची के जारी होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी का बयान जिसमें वह 72 से अधिक सीट जीतने का दावा करते हैं कमजोर पड़ गया। इस सूची की विशेषता है 4 महिलाओं को टिकट देना, रेवती कर्मा का टिकट कटना मायने नहीं रखता क्योंकि टिकट उन्हीं के घर उनके बेटे को दे दिया गया। 
आज ही एआईसीसी हेड क्वार्टर पर कांग्रेस के प्रवक्ता का पत्रकारवार्ता हुई सपरा जी ने कहा प्रत्याशी का पहला मापदंड जीतने योग्य चेहरा है। नाम वार को नहीं काम वार टिकट दे रहे हैं। क्योंकि कांग्रेस में लोकतंत्र है यदि प्रवक्ता का यह बयान सही है तो अब उसे मैदानी क्षेत्र की सीट पर बेहतर ध्यान देना होगा। कांग्रेस के रणनीतिकारों को यह भी देखना होगा कि विधानसभा चुनाव के 6 महीने बाद लोकसभा के चुनाव हैं और छत्तीसगढ़ की 11 सीट में से कांग्रेस को कभी 1 कभी 2 पर ही जीत मिलती है। ऐसे में बिलासपुर लोकसभा, कोरबा लोकसभा और जांजगीर लोकसभा सीट की विधानसभा सीट के लिए जब प्रत्याशी घोषित किए जाएं तो यह भी देखा जाए कि वह प्रत्याशी अपनी सीट जीत लेने के बाद लोकसभा में पार्टी के प्रत्याशियों को जिताने में कैसी भूमिका अदा करेगा।
यदि 2023 विधानसभा चुनाव सेमीफाइनल है तो लोकसभा चुनाव फाइनल है। और हाई कमान को छत्तीसगढ़ में कम से कम 6 लोकसभा सीट तो जितनी ही चाहिए। केवल ओबीसी प्रत्याशी देने मात्र से यह नहीं होगा। कांग्रेस को अपने अनुसूचित जनजाति की 29 सीट और अनुसूचित जाति की 10 सीट पर बहुत सोच समझकर प्रत्याशी देने होंगे। आज जो सूची जारी हुई उसमें एससी आरक्षित के लिए 3 प्रत्याशी घोषित हुए और एसटी के लिए 13 इस तरह से अब एसटी के लिए 16 और एससी के लिए 7 स्थान बसते हैं। पार्टी हाई कमान चाहे तो एसटी- एससी की शेष सेट पर ऐसे प्रत्याशियों को जगह दी जानी चाहिए जिसका प्रभाव सामान्य सीट पर भी है तभी लोकसभा के लिए तैयारी अभी से होगी।
बिलासपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत जो विधानसभा आती है उसमें कोटा, तखतपुर, बिल्हा, बिलासपुर, बेलतरा, मस्तूरी एससी आरक्षित है। मुंगेली एससी आरक्षित और लोरमी है। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी यहां से बुरी तरह हारे थे। भारतीय जनता पार्टी को यहां 52.47 प्रतिशत वोट मिला कांग्रेस को मात्र 40% बोर्ड पर ही संतोष करना पड़ा। भाजपा के जीते हुए सांसद अरुण साव अब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं और विधानसभा चुनाव भी लड़ रहे हैं जबकि कांग्रेस ने अटल श्रीवास्तव को अपना प्रत्याशी बनाया था वे भी टिकट की मांग कर रहे हैं और प्रदेश के मुखिया के खास बताए जाते हैं। ऐसा सांसद प्रत्याशी जो लोकसभा में 8 विधानसभाओं में से 7 पर हार गया हो उसे जीतने लायक चेहरा कैसे कहा जा सकता है और कांग्रेस प्रवक्ता आज ही मापदंड की बात कर रहे थे। इसी तरह जांजगीर-चांपा आरक्षित एससी सीट से कांग्रेस ने अपना प्रतिनिधित्व डॉक्टर प्रेमचंद जैसी को दिया था। भाजपा की जीती हुई प्रत्याशी को 48% वोट मिला और कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी को मात्र 32% बोर्ड पर संतुष्ट रहना पड़ा। ऐसा बताया जाता है कि जांजगीर के हारे हुए प्रत्याशी वर्तमान में बिलासपुर लोकसभा की आरक्षित सीट मस्तूरी से टिकट का दावा कर रहे हैं। और उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश के पूर्व प्रभारी पीएल पुनिया का विशेष सहयोग प्राप्त हो रहा है। कार्यकर्ता कहते हैं कि जिसे जांजगीर चांपा लोकसभा के मतदाताओं ने नकारदिए पहले तो उसे प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष का पद दे दिया गया अब यदि मस्तूरी विधानसभा पर लाद दिया गया तो पहले से ही नाराज सतनामी समाज उसे अपने अनदर के रूप में लगा। क्षेत्र की जनता यह भी कहती है कि दीवाल पर भले ही कोई 2 साल से नाम लिखवा दे पर काम तो किसी के नहीं आता, जिन नेताओं ने स्वयं को दीवाल पर लोकप्रिय बनाया उन्होंने स्थानीय संगठन से हमेशा दूरी बनाकर रखी यह अपने आप में स्वयं को बड़ा और स्थानीय संगठन को सदा नीचा दिखाने वाला रहा है। ऐसे में स्थानीय कार्यकर्ता कथित रूप से श्रेष्ठी बनने वाले नेता से स्वयं को कैसे जोड़ ले। अर्थात कांग्रेस प्रवक्ता का मानदंड नाम वर और काम वर यहां कमजोर पड़ जाता है।
 
छत्तीसगढ़ की जो सूची आज जारी हुई उसमें सबसे महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्र कोरबा है यहां से वर्तमान में कांग्रेस की ज्योत्सना महंत सांसद हैं वे छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष जो सक्ति विधानसभा अंतर्गत आता है से चुनाव लड़ रहे हैं। इसी संसदीय क्षेत्र में कोरबा विधानसभा से जय सिंह अग्रवाल को टिकट मिली है वे छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल के राजस्व विभाग के मंत्री हैं। कोरबा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत कोरबा, भरतपुर सोनहत, महेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, रामपुर, कटघोरा, पाली तानाखार, मरवाही। रामपुर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। ऐसे में भले ही कोरबा लोकसभा सामान्य सीट हो पर अनुसूचित जनजाति प्रभावित है। विशेष कर पाली तानाखार और मरवाही कांग्रेस के लिए विशेष महत्व रखता है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्र के विधायक के खिलाफ क्षेत्र में नागरिकों में भारी रोस है। मरवाही का चुनाव अजीत जोगी के निधन के बाद सत्ता के जोर से भूपेश बघेल ने भले ही जीत लिया पर यहां के निर्वाचित विधायक के खिलाफ जनता में नाराजगी है। पाली तानाखार मध्य प्रदेश के समय से विधानसभा क्षेत्र का दर्जा रखता है। विकास की दृष्टि से पिछड़ा हुआ है भारतीय जनता पार्टी ने यहां से अपने बड़े नेता रामदयाल उईके को टिकट दिया है। और मोहित केरकेट्टा रामदयाल उईके के सामने टिकने योग्य कैंडिडेट नहीं है। यहीं से कांग्रेस के उच्च शिक्षित संत कुमार नेताम ने भी टिकट मांगा है नेताम छत्तीसगढ़ में किसी पहचान के मोहताज नहीं है। यह वही शख्स है जो 2001 से छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के फर्जी जाति सर्टिफिकेट के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है। और प्रशासनिक दबाव में जब अजीत जोगी की बहू रिचा जोगी को कुछ ही घंटे में जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ तब भी संत कुमार नेताम ने ही लड़ाई लड़ी और जीती, सीधा अर्थ है छत्तीसगढ़ से छत्तीसगढ़ की राजनीति से जोगी परिवार की विदाई के पीछे एकमात्र संत कुमार नेताम को ही श्रेय दिया जा सकता है।
उन्होंने 20 साल फर्जी जाति प्रमाण पत्र की लड़ाई लड़ी और अब यदि पाली तानाखार से टिकट मांग रहे हैं तो पार्टी हाई कमान को उसे पर ध्यान देना चाहिए। पाली तानाखार के अतिरिक्त यह नाम कांग्रेस को बिलासपुर जिले के कोटा और नवगठित जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के मरवाही विधानसभा सीट में लाभप्रद होगा।
छत्तीसगढ़ में लंबा वक्त बीत गया छत्तीसगढ़ लोकसभा चुनाव की दृष्टि से कभी भी कांग्रेस के लिए मुशीद नहीं रखा ऐसे में एक बार कांग्रेस हाई कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जो स्वयं एससी वर्ग से आते हैं और राहुल गांधी जो स्वयं को आदिवासियों का सर्वहारा वर्ग का हितौसी बताते हैं। के लिए अवसर है की विधानसभा के इस चुनाव में शेष बची हुई सीट पर इस तरह प्रत्याशी चयन करें की 2024 के लोकसभा चुनाव में मैदानी क्षेत्र की 3 सीट बिलासपुर, जांजगीर चंपा और कोरबा कांग्रेस के पास जाए।