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माथुर से लेकर पवन तक हुए अदृश्य, वाह रे गोदी मीडिया नहीं दिखा बीजेपी का विवाद

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बिलासपुर, 1 अक्टूबर 2023। 
राजनीतिक समाचार विशेष कर सभा रैली में नेता के भाषण के अतिरिक्त ऐसी बहुत सी चीज होती है जिसे आम जनता जानना चाहती है और इसका माध्यम पत्रकार ही हो सकते हैं। पर बिलासपुर में गोदी मीडिया के एक नए संस्करण के चलते अब यह संभव नहीं है।
हम इसे दरबारी मीडिया का अपडेट वर्जन इसलिए कह रहे हैं की यह मीडिया पिछले 4 साल से खता तो कांग्रेस की है और छुपाता भाजपा की है।
पूरे छत्तीसगढ़ में दो परिवर्तन यात्रा का समापन बिलासपुर में हुआ और इस सभा को भाजपा के एकमात्र नेता परिधान मंत्री ने संबोधित किया। सत्ता को बदलकर रख देने की दावा करने वाली इस रैली में भाजपा के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर, अजय जामवाल, नितिन नवीन और पवन साय मौजूद नहीं थे।
भाजपा संवाद कार्यालय से कल शाम को प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई उससे भी यह स्पष्ट होता है जितने सांसद रैली में आए थे सब का नाम है संगठन के बड़े नेताओं का भी नाम है पर यह चार नाम नहीं है। संगठन के चार बड़े नेता यदि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे और नेशनल हीरो राहुल गांधी की आम सभा में गायब हो जाते तो यही दरबारी मीडिया चिख- चिख कर पार्टी में फूट, गुटबाजी, पार्टी विखंड, नई पार्टी का संकेत जाने किस किस शीर्षक से पट जाते पर यहां तो आनंदा इंपिरियल का टुकड़ा इतना भारी हो जाता है कि इतने बड़े देखे हुए दृश्य को अनदेख कर देता है और तरस आता है कांग्रेस के नेता और संगठन के बुद्धि पर जो निष्पक्ष पत्रकारों की पहचान भूलकर संघी पत्रकारों की आओ भगत करने में तन मन धन से समर्पित है। और इतना ही नहीं 4 साल में जब कभी किसी सरकारी पद पर किसी परामर्श समिति में मीडिया जगत के किसी व्यक्ति को बैठने की बारी आई तो पद का पहला क्वालिफिकेशन उसका संधि होना अनिवार्य रखा गया।
अब उठना है मूल प्रश्न कि भाजपा के यह चार नेता थे कहां और क्या कर रहे थे। असल में भाजपा के छत्तीसगढ़ में पहली सूची जारी होने के बाद दूसरी सूची के लिए कुश्ती हद से ज्यादा बढ़ गई है। एक तरफ छत्तीसगढ़ के बड़े नेताओं का दबाव, आरएसएस का दबाव और केंद्र से बीजेपी के दूसरे सबसे बड़े नेता द्वारा खींचा जा रहा तार के बीच इन चारों नेताओं का तानपुरा बिगड़ गया है। और इसे ही संभालने में यह व्यस्त है।