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पीएम अपनी नाकामियों को सनातन धर्म की चादर से क्यों ढंकते हैं

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बिलासपुर, 29 सितंबर 2023।
देश का समाज धर्मभीरू है और इसी कारण 9 साल की नाकामियों को बीजेपी के दो चेहरे सनातनी चादर से ढकने से लगे हैं यह देश के समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष संविधान को खतरे में डालने वाली बात है। संविधान कहता है नागरिकों में वैज्ञानिक सोच और धर्म कहता है पीछे की ओर चलो। मैं सनातन विरोधी नहीं संविधान का समर्थक हूं। और संविधान, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, गणतंत्र जो समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व पर आधारित है। जबकि सनातन धर्म में इन चीजों का घोर अभाव है वैसे एक चीज को और समझ ले सनातन विशेषण है संज्ञा नहीं, देश में कई वर्ग को सनातन ने नहीं संविधान में न्याय दिलाया है। आज संविधान का ही करिश्मा है की 75 साल में एससी और महिला वर्ग ने मिलकर एक बड़े मध्यम वर्ग की संरचना खड़ी की है और यही मध्यम वर्ग भारतीय अर्थव्यवस्था को झेल कर चलता है। ज्योति बाई फुले, सावित्री बाई फुले, स्वामी दयानंद सरस्वती के आंदोलन को देखें कोई तालाब के पानी के लिए लड़ रहा है तो कोई महिलाओं के अधिकारों के लिए और इसे रोकने का काम सनातन के ठेकेदारों ने ही किया है। गांधी जी, अंबेडकर जी ने कई बार मंदिरों में प्रवेश के लिए आंदोलनो का नेतृत्व किया पुरानी बातों को छोड़ भी दे तो सबरी माला मंदिर उच्चतम न्यायालय के आदेश का विरोध करने वाले आंदोलन को भारतीय जनता पार्टी ने खूब मदद की सनातन की व्यवस्था किससे चलेगी यह कोई व्यवस्था नहीं बताता संविधान से चलेगी या मनु स्मृति से चलेगी सावरकर तो मनुस्मृति को हिंदी लॉ बताते थे। सनातन का दर्शन बदलाव को रोकता है। कर्म फल सिद्धांत, पुनर्जन्म व्यक्ति के जीवन में रोडे अटकत हैं। ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या का पाठ जनता को इसीलिए पढ़ाया जाता कि वह इस चक्कर में पड़ा रहे। देश में 75 साल में जो सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं उसमें धर्म की अपेक्षा संविधान की भूमिका बड़ी है। एमपी में पीएम ने सनातन धर्म को खतरे में बताया और रेदास को सनातन धर्म का फॉलोअर बताया। इतिहास को गप्पों के समान अपने भाषण में इस्तेमाल करना उनकी सोची समझी साजिश है। 9 साल की नाकामी क्या इसी तरह सनातन धर्म की चादर से ढक ली जाएगी।