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बाहरी और क्षेत्रीय की परिभाषा नेता अपनी सुविधा अनुसार बनाते बिगड़ते हैं, मस्तूरी में उठा बाहरी का मुद्दा
- By 24hnbc --
- Monday, 18 Sep, 2023
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बिलासपुर, 18 सितंबर 2022।
चुनाव में हमेशा क्षेत्रीय और बाहरी प्रत्याशी की चर्चा होती है एक अन्य शब्द जो बहुतायात से इस्तेमाल होता है, पैराशूट उम्मीदवार इन सब की परिभाषा नेता और उसके समर्थक स्वयं ही अपनी सुविधा से बनते बिगड़ते हैं। इन दिनों बिलासपुर जिले की विधानसभा सीट मस्तूरी क्षेत्र क्रमांक 32 में स्थानीय उम्मीदवार की मांग को लेकर कुछ प्रत्याशी लामबंध हो रहे हैं। ऐसे में डेक्ची का चावल कैसा है समझने के लिए एक दाना उठाना ही पर्याप्त है।
प्रदेश कांग्रेस के एक उपाध्यक्ष जो इन दोनों मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनने के प्रयत्नशील है पूर्व में जिला पंचायत जांजगीर चांपा से ना केबल जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े जीते और पद का दायित्व पूरा किये। जनप्रतिनिधित्व कानून के नियम बताते हैं की जिला पंचायत सदस्य का चुनाव स्थानीय मतदाता ही लड़ सकता है अवश्य ही वे रहे होंगे तभी उनका नामांकन पत्र स्वीकार हुआ ऐसे में आज वे मस्तूरी क्षेत्र क्रमांक 32 जिला बिलासपुर में स्थानीय उम्मीदवार की बात रखने वालों का नेतृत्व किस नैतिक आधार पर करते हैं।
मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2018 के चुनाव में गलत प्रत्याशी चयन के कारण कांग्रेस तीसरे नंबर पर पहुंच गई। बार-बार मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र आरक्षित की तुलना बिलासपुर विधानसभा पूर्व की स्थिति से करनी पड़ती है क्योंकि जिले की 6 सीट में से एक यही ऐसा क्षेत्र है जहां पर फूल छाप कांग्रेसी भाजपा के पक्ष में खुलकर काम करते हैं राजनीति के गहन जानकार यहां तक कहने से बाज नहीं आते कि भाजपा का प्रत्याशी ही अन्य राजनीतिक दल के उम्मीदवार अपनी इच्छा अनुसार चून लेता है, ऐसी बातों का कोई सबूत नहीं होता पर जिस तरह वोटो का बंटवारा परिणाम के साथ बाहर आता है मानना पड़ता है।
2018 के परिणाम के सदमे के बाद मस्तूरी क्षेत्र में जिस तरह से पार्टी के नेताओं ने मेहनत करके संगठन को खड़ा किया है एक अकेला यही क्षेत्र है जहां पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का कोई पदाधिकारी टिकट नहीं मांग रहा है। दावेदारों का क्रम आगे पीछे हो सकता है पर किसी एक को पछाड़ने के लिए शेष सब लामबंदी कर ले तब यह तो पता ही चल जाता है कि टिकट की दौड़ में आगे कौन है।


