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प्रायोजित आंदोलन में भी सेल्फगोल मारते दिखे कांग्रेस के पदाधिकारी

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बिलासपुर, 14 सितंबर 2023।
कांग्रेस के रेल रोको आंदोलन में पदाधिकारी के बीच अपनी ही टीम में गोल करने की स्पर्धा तब दिखाई दी। दूसरी जो बात स्पष्ट रूप से नजर आई वह थी खाकी के द्वारा पूर्व में की गई पिटाई से ना उबर पाने की मानसिकता लगता है, सुरक्षित वातावरण में आंदोलन के आदी हो गए हैं बिलासपुर के कांग्रेसी नेता।
एक पदाधिकारी की टिकट की चाह इतनी बलवती हो गई है कि वे अपने चुनिंदा साथियों के साथ बिलासपुर से लगभग 24 किलोमीटर दूर स्थित एक स्टेशन पर सुबह 5:00 बजे ही रेल रोको का आरंभ करने चल दिए फोटोसेशन भी करा डाला यह बिलासपुर के कांग्रेसी नेता की पुरानी बीमारी है। कभी रेनकोट बाटकर, कभी ट्रैकसूट बाटकर ऐसा काम कराया जाता है।
लगभग 24 किलोमीटर दूर के स्टेशन पर मीडिया प्रोजेक्शन भरपूर नहीं मिलता इसलिए मुख्यालय में भी इस नेता ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अपनी ही पार्टी के बड़े पदाधिकारी की इस श्रेय लूटने की अदा से अन्य नेता नाराज नजर आते हैं। वह कहते हैं समोसा भी आप ही खाओगे, गुलाब जामुन भी आप ही खाओगे। टिकट का दावा भी आप ही करेंगे, संगठन का पद भी आप ही संभालेंगे, निगम की राजनीति भी आप ही करेंगे।
 बिलासपुर के नेता रेलवे आंदोलन को लेकर गहन अनुभवी हैं इसी कारण रेल रोको आंदोलन एकदम सेफजोन में किया गया। कब ज्ञापन देंगे ज्ञापन देने के पहले कितनी देर नारेबाजी होगी, सब कुछ पहले से तय नजर आ रहा था। इसलिए एक बड़े पड़ोसी विधायक मात्र 7 मिनट ही कार्यक्रम स्थल पर दिखाई दिए उसे दौरान का वीडियो फुटेज देखकर यह समझा जा सकता है कि जहां पार्टी के अन्य कार्यकर्ता एवं नेता प्रधानमंत्री मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे विधायक प्लेटफार्म पर बैठकर चुप थे।
कुछ नेता तो सड़क पर आंदोलन में दिखाई दिए पर प्लेटफार्म पर नहीं आए, कांग्रेस नेता यह भूल गए की रेलवे क्षेत्र में आरपीएफ और जेआरपी दो सुरक्षा बल होते हैं और उनके आंदोलन से निपटने का काम जेआरपी का था।