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जिन्होंने बेड़ियां स्वयं अपने गले से पैर तक पहनी है उन्हें स्वतंत्र करने की इतनी चिंता क्यों

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बिलासपुर, 2 सितंबर 2023।
इंडिया को दरबारी मीडिया के गुलामी की इतनी चिंता क्यों है। ये वो बिरादरी है जिसने गुलामी को, चाटुकारिता को स्वयं पहना है यहां हम ओढ़ा शब्द जानबूझकर इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इसलिए कह रहे हैं कि कांग्रेस मीडिया को स्वतंत्र करने की बिना मतलब की कवायत न करें। इस एक खबर से गुलामी की मकसद को समझे..... की न्यूज़ के मालिक का 7000 करोड़ कर्ज में से 75% को माफ करके सेटलमेंट कर लिया क्या कांग्रेस ऐसे ही लोगों के स्वतंत्र होने के लिए प्रयास कर रही है। इतनी सीधी सी चीज उन्हें समझ क्यों नहीं आती की या वो मीडिया है जिसे कहा जाता है तो वह रंगने लगती है। राहुल गांधी की दादी ने भी इसी मीडिया को आपातकाल के समय उपयोग किया था। आप अगर कोई दूसरा कर रहा है तो इन्हें चिंता नहीं होना चाहिए। सैकड़ो नहीं हजारों की संख्या में देश के भीतर स्वतंत्र बौद्धिक क्षमता युक्त पत्रकार है जो अपने-अपने प्रदेश में लोकतंत्र की और मीडिया की चौकशी कर रहे हैं। ऐसे मे चाटुकार, गोदी, दरबारी, गुलाम मीडिया की चिंता कांग्रेस को क्यों हो रही है। कांग्रेस के नेता जब कभी भी सत्ता में आते हैं तब सबसे पहले वे ऐसे पत्रकारों को मिठाई खिलाते हैं जिनकी सोच निष्पक्ष नहीं होती और स्पष्ट करें उनकी सोच ऐसी संस्था के प्रति वफादारी की है जिसे राहुल गांधी हमेशा अपने निशाने पर रखते हैं उसके बावजूद कांग्रेस के नीति नियंता इस दरबारी मीडिया के स्वतंत्रता के इतने पक्षधर क्यों हैं।