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बिलासपुर जिले की मस्तूरी सीट इस बार बन रही है व्हीआईपी, रोचक होगा मुकाबला

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बिलासपुर, 2 सितंबर 2023।
इस बार के विधानसभा चुनाव में बिलासपुर जिले की मस्तूरी विधानसभा सीट में चुनावी मुकाबला रोचक होने जा रहा है। सूत्रों की माने तो भारतीय जनता पार्टी के अपने सर्वे में यह सीट खतरे में है। ऐसे में दो लोग बड़े खुश है नंबर एक खुशी भाजपा के उसे खेमे में है जिसे टिकट की उम्मीद है और दूसरा खुश वह पक्ष है जिसके पास ब्लॉक कांग्रेस संगठन की कमान है। यदि भाजपा के लिए मस्तूरी सीट खतरे में है तो निश्चित रूप से ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष की पीठ थपथपाई जानी चाहिये कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इतना तो किया की मस्तूरी में कांग्रेस को जीत के करीब ला दिया। उन्हें बधाई इस नाते भी दी जानी चाहिए की मस्तूरी आरक्षित सीट है और ब्लॉक अध्यक्ष सवर्ण है उन्होंने संगठन को मेहनत से खड़ा किया कहा जाता है कि राजनीति में मेहनत कभी की जाती है जब स्वयं को कुछ पाना हो पर यहां ऐसा नहीं था। टिकट का दवा वे कर नहीं सकते और मस्तूरी से कांग्रेस के जितने दावेदार हैं उनमें से ब्लॉक अध्यक्ष की टीम से कोई नहीं है। सीधा अर्थ है दावेदारी की ही नहीं गई। जयरामनगर में जो संकल्प शिविर हुआ उसमें भी गुटबाजी की खबरें नहीं आई कारण दो हो सकते हैं या तो डिब्बा, लिफाफा बात कर तमाम मीडिया का मुंह बंद किया गया या गुटबाजी हुई ही नहीं। पहले संभावना कम है क्योंकि कितना भी बाट दिया जाए दरबारी मीडिया का पेट नहीं भर सकता इसे समुद्र में शक्कर बोलना कहा जाता है जो संभव नहीं है। हर नेता का अपना निजी मीडिया समूह है और अपने-अपने नेता को यह समूह आगे बढ़ाना ही अपना काम मानता है। यदि जयरामनगर सम्मेलन में किसी भी नेता की उपेक्षा हो जाती तो उसके समर्थक पत्रकार खबरें जरूर लिखते। मसूरी विधानसभा का मुकाबला रोचक इस कारण है कि सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी में टिकट का चयन कौन चुनाव लड़ेगा वर्तमान विधायक एक बार चुनाव हार चुके हैं पिछला टिकट उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ रमन की कोशिशो से मिला पर इस बार टिकट वितरण में डॉक्टर साहब की कितना चलेगी इस पर संदेह है और विधायक अपना टिकट कैसे बचाएंगे। कांग्रेस से टिकट की दौड़ में महिला प्रत्याशी के आगे आने की खबरें हैं कहा जाता है कि एक महिला दावेदार को कांग्रेस के एक बड़े नेता का आशीर्वाद हासिल हो गया है। बिलासपुर जिले से परंपरा अनुसार एक महिला प्रत्याशी को टिकट दिया जाता है तो क्या इस बार कांग्रेस अपने इस कोटे को मजदूरी में पूरा करने जा रही है।