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ईडी जितना तेजी से छत्तीसगढ़ में करेगी कार्यवाही, भाजपा की जीत से दूरी उतनी ही बढ़ेगी

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बिलासपुर, 29 अगस्त 2023।
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार जैसे-जैसे अपने विधानसभा स्तरीय संकल्प शिविर के कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है वैसे-वैसे ईडी और आईटी को इस छोटे से राज्य में बेहद मेहनत करनी पड़ रही है। कटाक्ष के तौर पर कहा जाता है भाजपा के कार्यकर्ता निट्ठल्ले और टल्लहा की मुद्रा में है और पूरे योग आसन ईडी कर रही है। ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए सब कुछ आसान है पर ईडी और आईटी की मेहनत कांग्रेस के रास्ते को आसान बना रही है। 2003 के बाद कोटा बाई इलेक्शन के दौरान का एक अनुभव है। भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री एक अन्य कैबिनेट मंत्री बृजमोहन और उसे समय के झारखंड के मुख्यमंत्री कोटा में प्रचार कर रहे थे। उन्होंने एक अभद्र टिप्पणी कांग्रेस के प्रत्याशी पर की इस टिप्पणी पर जब प्रत्याशी के पति पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी से प्रतिक्रिया चाही गई तो उन्होंने कहा ऐसी दो-चार टिप्पणी और कर दें मेरी जीत सहज हो जाएगी। बाद में अजीत जोगी ने कहा यह छत्तीसगढ़ है यहां के मतदाता विशेष कर ग्रामीण और अंदरूनी क्षेत्र के बाहरी हस्तक्षेप पसंद नहीं करते जितना ज्यादा हस्तक्षेप होगा वे अपनों के साथ उतनी मजबूती से खड़े होंगे आज जोगी जी की यही बात फिर से याद आती है। भूपेश बघेल से या किसी भी मंत्री से या किसी भी कांग्रेसी विधायक से जनता नाराज हो सकती है, पर यदि उनके खिलाफ बाहरी एजेंसियां प्रताड़ना की हद तक कार्यवाही करती नजर आएगी तो छत्तीसगढ़ के मतदाता अपने आप उसे छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान से जोड़ेगा और लाल किले को मुगल प्रतीक मानते हुए एजेंसी को उसके संचालक द्वै को बाहरी मान लेगा। संकल्प शिविरों में मुख्यमंत्री का भाषण प्रदेश अध्यक्ष का भाषण और अन्य किसी समझदार के भाषण को पूरा सुने वे अपनी पार्टी के कार्यकर्ता को और मतदाता को यही संदेश दे रहे हैं कि ईडी की बेजा कार्यवाही छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान पर दिल्ली का अटैक है और हमें अटैक करने वालों पर जवाबी कार्यवाही बटन दबाकर करनी है। जैसे-जैसे कांग्रेस इस संदेश को मजबूती के साथ मतदाता के पास पहुंचाएगी भारतीय जनता पार्टी के लिए विधानसभा में प्रवेश कठिन होता जाएगा। बेहतर होता कि एजेंसी के अघोषित स्वामी छत्तीसगढ़ के स्वभाव को समझने और छत्तीसगढ़ की लड़ाई से जांच एजेंसी को दूर ही रखते। राजनीतिक आरोप भ्रष्टाचार के कथन का जुमला बनाते और सत्ता में आने पर जांच का भरोसा देते पर वे तो सामने वाले पर छापे डालकर अपना मुख उजाला दिखाना चाहते हैं जबकि अभी तक रमन सिंह और उनके सहयोगियों के चेहरों से 15 साल के दाग हटे ही नहीं है । अपने दाग हटाए बिना सामने वाले का चेहरा दाग दार करने से राजनीतिक लाभ नहीं लिया जा सकता।