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उलझाऊ प्रत्याशी तय करेंगे किसकी बनेगी सरकार

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बिलासपुर, 24 अगस्त 2023।
 छत्तीसगढ़ की राजनीति का कड़वा सच यह है कि ना तो सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 90 जिताऊ चेहरे हैं ना ही विपक्षी भाजपा के पास, भले ही कांग्रेस का नेतृत्व 82 पार का नारा दे या बीजेपी के नेता सरकार बनाने का दवा करें। वास्तविकता यह है कि भाजपा के पास निश्चित रूप से जीती जा सकने वाली सीट की संख्या 26 से 28 हैं और कांग्रेस के पास 56 से 52 इस तरह 80 सीट तय है 10 पर समीकरण बनते बिगड़ते हैं। दोनों पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि इन दोनों राजनीतिक दलों में उलझाऊ प्रत्याशी ढूंढने के लिए विशेष तरीके खोजे जा रहे हैं। चुनाव मैदान में वोट कटवा श्रेणी से ऊपर उलझाऊ प्रत्याशी है या ऐसा प्रत्याशी होता है इसके जितने की संभावना तो नहीं होती पर उसके अंदर वह माददा होता है कि वह जीतने वाले प्रत्याशी को एक ही विधानसभा में फंसा कर रखता है इस कारण उलझाऊ प्रत्याशी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले की पाटन सीट पर भाजपा प्रत्याशी सांसद विजय बघेल इसी श्रेणी के हैं। 2003 के चुनाव में मरवाही में भाजपा प्रत्याशी नंदकुमार साय इसी श्रेणी के थे। भाजपा कम से कम 10 सीटों पर उलझाऊ प्रत्याशी की तलाश कर रही हैं। अब कांग्रेस को यह काट खोजना है कि वे सीट जिसे जीत नहीं जा सकता वहां पर उलझाऊ प्रत्याशी खोज कर उतारे जाएं पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कुछ दमदार नेता जो जेसीसीजे जैश छोड़कर कांग्रेस में आए थे वे कांग्रेस से टिकट तो का गए पर उलझाऊ प्रत्याशी की श्रेणी भी नहीं ला पाए। 2023 का चुनाव छत्तीसगढ़ में सरकार किसकी बनेगी उलझाऊ प्रत्याशी ही तय करेंगे। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता अपने कुछ नेताओं को विधानसभा में आवश्यक रूप से देखना चाहती है उनके लिए सुरक्षित सीट की तलाश की जा रही है ये वे नेता है जो पार्टी के लिए कुबेर की हैसियत रखते हैं और सूत्र बताते हैं कि इनकी उपयोगिता पूरी ली गई साथ ही इन्हें उनके जिले के अतिरिक्त अन्य स्थानों में भी सक्रिय किया गया यही कारण है कि अपनी परंपरागत विधानसभा छोड़कर सुरक्षित सीट की ओर ऐसे नेता कुच कर सकते हैं। आम नागरिकों को अपने-अपने क्षेत्र के भाजपा के बड़े नेता जो सुरक्षित कुच की तैयारी में है शीघ्र ही पता चलेगें। भाजपा ऐसा करके दो लाभ लेना चाहती है पहले कद्दावर नेता की सीट बदल दी सुरक्षित सीट दे दी साथ ही स्थापित राजनीति को विदा करते हुए उसे विधानसभा में जहां पर वर्षों से नए चेहरों को स्थान नहीं मिल रहा था वहां से नए चेहरों को मौका दिया।