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पाटन 1 अंबिकापुर 100 कहां है असल लोकतंत्र तय करे आवाम
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बिलासपुर, 23 अगस्त 2023।
छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ में 22 तारीख को कांग्रेस पार्टी में विधानसभा प्रत्याशी बनने के लिए आवेदन पत्र जमा करने का अंतिम दिन था। अभी तक संख्या जो संख्या उभर कर आई है वह तो हजारों में है पर 2018 के चुनाव में प्रचंड जीत के बाद दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जिन चार नेताओं का सिक्का चला उनमें ताम्रध्राज्य साहू, चरण दास महंत, टीएस सिंह देव और भूपेश बघेल थे। राहुल गांधी रहे हो या प्रियंका गांधी चारों की मीटिंग इन्हीं से हुई और इन्हीं के बीच से भूपेश बघेल को सीएम बनाया गया तभी शेष 3 का प्रोटोकॉल दिल्ली ने ही तय कर दिया था इस तरह से देखा जाए तो इन चार नेता को दिल्ली में हाई कमान ने एक कद का मना। पूरे 5 साल किसी का कोई विभाग नहीं बदला चरण दास महंत विधानसभा अध्यक्ष बने और कभी ऐसा नहीं लगा कि कुछ फेरबदल होगा यही हाल टीएस सिंह देव और ताम्रध्वज साहू का रहा। यह बात अलग है कि टीएस सिंह देव और भूपेश के बीच तभी से 2.5, 2.5 का की 20 चला रहा और अंत में चौथे साल पर जाकर जब नए चुनाव में जाने के लिए 6 माह मात्र बचा तब टीएस को डिप्टी सीएम घोषित किया गया। 90 विधानसभा में पाटन को छोड़ एक भी ऐसा नहीं है जहां पर कांग्रेस कार्यालय में दर्जन भर से ज्यादा आवेदन ना आए हो इसे कांग्रेस पार्टी का लोकतंत्र कहा जा सकता है जहां पर कोई मंत्री हो या विधानसभा अध्यक्ष पार्टी के दूसरे नेता टिकट मांगने से परहेज नहीं करते उदाहरण के लिए सक्ति विधानसभा आवेदन पत्रों की संख्या 10 और यहां से चरणदास महंत विधायक हैं विधानसभा अध्यक्ष भी इसी तरह दुर्ग वर्तमान विधायक ताम्रध्राज्य साहू गृह मंत्री हैं यहां से पांच आवेदन जमा हुए। अंबिकापुर में तो उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव की विधानसभा आवेदन पत्रों की बारिश हो गई शक लग गया 100 आवेदन जमा हो गए लगता है कांग्रेस पार्टी के इन चार दिग्गज नेताओं में से तीन ने अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को कभी नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा और कभी भी अपनी लाठी से जबरदस्ती किसी को हाका नहीं ऐसा इसलिए कहा जा रहा है की वर्तमान में कार्यकर्ता और प्रतिस्पर्धी नेता इतने श्रद्धालु नहीं है कि वे अपना नेतृत्व किसी एक के सामने मान ले और उसे ही घोषित तौर पर कमान दे दे तब पाटन में यह कैसे हो गया विधानसभा से यदि विधायक सीएम है तो क्या उसके विधानसभा में अन्य कोई नेता प्रत्याशी बनने लायक भी नहीं है या इसे कम का जलाल कहें, डर कहें, जलवा कहें। भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में 15 साल शासन किया कुछ नेताओं को छोड़ दे तो अधिकांश ने अपने-अपने क्षेत्र में नंबर दो नंबर तीन स्वतंत्र नेतृत्व बने ही नहीं दिया परिणाम जिस दिन सरकार गई पूरे प्रदेश में नए नेतृत्व का संकट है और अब तो स्थिति यह है कि बाहर से विधायकों को बुलाकर क्लास रूम लेक्चर देकर उन्हें विधानसभा क्षेत्र में भेजा जा रहा है की भैया जनता को यह बताओ कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार कैसे असफल रही और हम बेहतर कैसे हैं। सत्ताधारी पार्टी हो या विपक्ष सफल नेता वही है जो अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक वैकल्पिक नेतृत्व निर्मित होने दे नहीं होने देगा तो अपना तो नुकसान करेगा ही पार्टी का नुकसान भी करेगा।


