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कितने दिन टिकेंगे धरमजीत भाजपा में .... ?

दल बदलूओ को पसंद नहीं करते छत्तीसगढ़ के मतदाता

24hnbc.com
बिलासपुर, 13 अगस्त 2023।
"तू मेरा नेता ले जा मैं तेरा नेता ले जाऊंगा" समाचार की शुरुआत सम्मानजनक शब्द आप या तुम से नहीं की गई है क्योंकि नीचे से लेकर ऊपर तक राजनीतिक दलों के बीच सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल नेता आपस में स्वयं ही नहीं करते। आज भारतीय जनता पार्टी के एकात्म परिसर में लोरमी के विधायक जेसीसीजे से निष्कासित धरमजीत सिंह ने भाजपा प्रवेश कर लिया। उनके साथ प्रमोद शर्मा विधायक बलौदा बाजार भाजपा में नहीं गए भ्रष्टाचार के लिए चर्चित रहे आईएफएस बढ़गैंया ने जरूर भाजपा प्रवेश किया। कहते हैं नौकरशाहों को नौकरी करना हुकुम बजाना सहज होता है छत्तीसगढ़ में दलबदल और दबाव की राजनीति की शुरुआत 2001 में मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने की थी। कांग्रेस की सरकार थी जोगी जी मुख्यमंत्री थे और उन्होंने 12 विधायकों को भाजपा से कांग्रेस प्रवेश करा दिया था। चुनाव के बाद भी हार को सामने देख उन्होंने एक बार फिर से भाजपा के जीते हुए विधायकों को खरीदने की नाकाम कोशिश की थी और बाद में उसी और असफल फार्मूले को भाजपा ने पूरे भारतवर्ष में ऑपरेशन लोटस के रूप में सफलतापूर्वक चलाया।
छत्तीसगढ़ की जनता को दल बदलू नेता अच्छे नहीं लगता यह चुनाव का रिकार्ड बताता है भाजपा से कांग्रेस आने वाले हर विधायक को जोगी जी कांग्रेस की टिकट दिलाई पर एक नेता को छोड़ शकराजीत को छोड़कर शेष कोई नहीं जीत पाया। कांग्रेस पार्टी की हार का एक यही बड़ा कारण रहा उसके बाद एक उल्लेखनीय दलबदल लोकसभा चुनाव के पूर्व छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता बीसी शुक्ला ने किया वे भाजपा प्रवेश कर गए महासमुंद लोकसभा से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में कभी भी एक या दो स्थानों पर जीत से ज्यादा नहीं मिल रहा उस समय कांग्रेस में अपने निष्कासित नेता पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को महासमुंद से टिकट दी और बीसी शुक्ला चुनाव हरे कहते हैं बीसी शुक्ला को भाजपा के नेताओं ने ही हरवा दिया कारण चाहे कुछ भी हो पर दल बदलू शुक्ला को सबक मिल गया क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार गुलाटिया मारी थी एक बार तो जनता का चाबुक पढ़ना ही था। और भी उदाहरण 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेताओं ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामदयाल उईके को भाजपा प्रवेश करा दिया मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा था तानाखार से टिकट भी दी वे उस समय तानाखार से विधायक भी थे। कांग्रेस के रणनीतिकार अचंभे में पड़ गए तानाखार से एक अनजान चेहरा मोहित केरकेट्टा को उतारा गया कई बार से विधायक रामदयाल उईके एक अनजान चेहरा केरकेट्टा से हार गए और अब राजनीतिक वनवास में हैं पता नहीं कहां। पिछले कुछ वर्षों से भाजपा के भाजपा में मार्गदर्शक मंडल की बड़ी चर्चा होती है। लोरमी विधायक का भाजपा प्रवेश जिस आयु में हुआ है वह आयु तो मार्गदर्शक मंडल में जाने की है काम निकल जाने पर या उपयोगी उपयोगिता खा देने पर परंपरागत कार्य करने में भाजपा को तनिक भी संकोच नहीं होता अभी भी विधानसभा चुनाव दूर है। भाजपा से कांग्रेस कांग्रेस से भाजपा और दिखाई देगा यह भी संभव है कि यह क्रम आप, एनसीपी, बसपा, सर्व आदिवासी समाज के बीच भी दिखाई दे जाए। इसके पूर्व एसटी का बड़ा चेहरा नंदकुमार साय भाजपा से कांग्रेस चले गए भाजपा ने गोपनीय वार से अरविंद नेताम को प्रायोजित कर दिया। धरमजीत सिंह ना तो ओबीसी हैं ना ही एससी यह जरूर है कि उनका प्रभाव एसटी बाहुल्य लोरमी सीट पर है। भाजपा प्रवेश के पूर्व कहा जाता है कि वे अपनी सीट कंफर्म करना चाहते थे पता नहीं प्रवेश के पूर्व कंफर्म हुई कि नहीं भाजपा के लिए बिलासपुर जिले में तखतपुर बिलासपुर प्रतिष्ठा पूर्ण सीट है और कोटा भी वे अपनी झोली में लाना चाहते हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि धरमजीत सिंह व्यक्तिगत मित्रता को बड़ा सम्मान देते हैं तब भाजपा के आदेश उन्हें कितना मान्य होंगे यह देखने लायक रहेगा।