राजकीय राजनीतिक चेतना का पतन
21वीं सदी में बुलडोजर वीरता का प्रतीक
- By 24hnbc --
- Friday, 07 Jul, 2023
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बिलासपुर, 8 जुलाई 2003। भारतीय जनता पार्टी को तसल्ली हो जाना चाहिए उनके प्रयास से हिंदू वैसा बन गया है जैसा वो चाहते थे बल्कि उससे ज्यादा विभत्स बन गया है। वासुदेव कुटुंबकम अब किताब की बात है या फिर इसे अशांत नेता अपने गर्जना और दंभ युक्त भाषण में जनता को बतौर गारंटी देते नजर आएंगे। और देने के पूर्व भी जनता से पूछेंगे दे दूं क्या.... और प्रजा चाहे या ना चाहे राजा है जो देना चाहेगा दे देगा। राजकीय और राजनीतिक चेतना के पतन का दौर है जिसे हम उत्तर प्रदेश से निकलते हुए भारत देश के ह्रदय मध्यप्रदेश में देख रहे हैं। ये दोनों प्रदेश अपने आप में भारत के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न- भिन्न करने के बाद बनने वाली रूपरेखा को बता रहे हैं। फिर से याद कर ले एक को प्रश्नों का उत्तर बताया जाता है और दूसरे को भारत देश का ह्रदय, मध्यप्रदेश में प्रवेश को नशा है प्रभुत्व का और यह इस वर्ग के अवचेतन में बसा है। इसे अपवाद कह कर टालने की कोशिश न करें। सच से मुंह चुराएंगे तो प्रवेश की संख्या बढ़ती जाएगी लोकलुभावन न्याय, जनप्रिय न्याय, न्याय ऑन डिमांड, न्याय और बदला सीधी में प्रवेश ने जो हरकत की उसके बाद निर्वाचित विधायक जिसे विधायकों ने प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना है राजा के समान व्यवहार कर रहा है और बुलडोजर की शक्ति दिखा रहा है जनता कह रही है प्रवेश के घर को पूरा क्यों नहीं तोड़ा, आधा मकान तोड़ने से न्याय होता नहीं दिख रहा, इस बात को समझें..... हम प्रारंभ से कहते हैं कि किसी का मकान वैध अवैध, नियमित अनियमित होना एक अलग बात है। किसी आपराधिक कृत्य की सजा किसी का मकान गिरा देना को न्याय कैसे कहा जा सकता। आज पूरा मकान गिरा देंगे तो न्याय हो जाएगा यह अवधारणा ही गलत है और यह अवधारणा आई कैसे इसे समझें..... न्याय लोकलुभावन मुद्दे को लेकर दिया जाने लगा और यह न्याय न्यायालय की जगह राजा साहब देने लगे यही तो 21वीं सदी का लोकतंत्र हो गया। हमने 1947 में जिन आदर्शों के साथ स्वतंत्रता प्राप्त की थी संविधान बनाया था और उसे अंगीकार किया था उसमें न्याय लोकलुभावन नहीं था पर धीरे-धीरे संविधान पर वोट भारी पड़ने लगा। और सरकार बनानी है तो एन केन प्रकारेण बन जाए भले ही उसकी कीमत कुछ भी हो। इन्हीं कारणों से नफरत की दुकान समाज को गर्त में ले जाएगी और सदाचार, नैतिकता, न्याय, ज्ञान, चरित्र, सत्य अहिंसा जैसे केवल नीतिशास्त्र की किताबों में स्थान पाएंगे समाज में मक्कारी, घृणा, झूठ, प्रभुत्व, कपट, छल, बल जैसे प्रत्यय स्थान पाएंगे और जब कभी 5 साल में वोट का दिन आएगा। तो पीड़ित का पैर धो देंगे, 5 लाख रुपया दे देंगे, डेढ़ लाख रुपया अतिरिक्त दे देंगे परिणाम के बाद प्रवेश फिर से हम पर 4 साल तक अपने शरीर का वेस्ट तरल पदार्थ गिराता रहेगा।


