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चुनाव समर में उतरने के पूर्व छत्तीसगढ़ में नेताओं ने परखी अपनी हैसियत
- By 24hnbc --
- Thursday, 06 Jul, 2023
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बिलासपुर, 7 जुलाई 2023। राजनीतिक दिलों में चुनाव जीतने की उत्कंठा इतनी ज्यादा है का उदाहरण छत्तीसगढ़ के ये 30 दिन हैं। जून और जुलाई के मध्य छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस भाजपा और आम आदमी पार्टी ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत छत्तीसगढ़ पर लगा दी। इसी क्रम में आम आदमी पार्टी ने अपने दो मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ की भूमि पर एक साथ भेजा तो भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन और सत्ता दोनों का खुला प्रदर्शन किया। भाजपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिलासपुर में आमसभा की तो सत्ता के 3 बड़े खंभे छत्तीसगढ़ में आम सभा करे। पहला देश के गृहमंत्री अमित शाह, दूसरा देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आज प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को चार्ज किया। इसी महीने में छत्तीसगढ़ में सत्ता में बैठी कांग्रेस ने भी पूरी गंभीरता के साथ अपने कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव के लिए तैयार किया इससे ही अंदाज लग जाता है कि 90 विधानसभा सीट वाला छत्तीसगढ़ राज्य कितना महत्वपूर्ण है। 2003 के बाद भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक शासन किया और आदिवासी बाहुल्य इस राज्य में उनका मुख्यमंत्री सवर्ण डॉ रमन सिंह रहे। जाति राजनीति और सोशल इंजीनियरिंग को समझते हुए कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग की महत्वता समझी भाजपा द्वारा लगातार उपेक्षित किए जा रहे एसटी वर्ग को साधा और ना केवल भाजपा को सत्ता से बाहर किया बल्कि उसे अत्यंत दयनीय स्थिति पर मात्र 14 पर ला दिया। केंद्र में मोदी और गृहमंत्री के रूप में अमित शाह का टानिक भी छत्तीसगढ़ के भाजपाई नेताओं में ऊर्जा का संचार नहीं कर पाया जबकि पिछले 2 साल से छत्तीसगढ़ में केंद्र के 2 मोहरे ईडी और आईटी पूरी रफ्तार से दौड़ रहे हैं। इस बीच भाजपा के हाईकमान ने प्रदेश भाजपा का ना केवल अध्यक्ष बदला नेता प्रतिपक्ष भी बदल डाला और दो बार प्रभारी भी बदले पर संतुष्टि हाथ नहीं आई अब जब आचार संहिता लगने के मात्र 100 दिन शेष है तो भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अपनी पूरी शक्ति लगाकर प्रदेश में पार्टी को पुनर्जीवन देने का प्रयास कर रहे हैं।
दिल्ली राज्य की सत्ता में 3 चुनाव जीतने वाली आप पार्टी भले ही गुजरात कर्नाटक में अपना प्रभाव नहीं दिखा पाई पर उन्हें छत्तीसगढ़ में स्वयं के लिए स्थितियां अनुकूल नजर आती है। हालांकि जानकार आपको खुलेआम भाजपा की बी टीम ही कह रहे हैं। आप ने भी जुलाई माह में ही बिलासपुर में एक बड़ी आम सभा की जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मांग ने जनता को संबोधित किया। सभा स्थल में भीड़ उम्मीद से अधिक थी पर इसे किसी तरह का राजनीतिक संकेत नहीं माना जा सकता राज्य धान कृषि प्रधान है और छत्तीसगढ़ में मानसून का प्रवेश हो चुका है ऐसे में अब लगभग 2 माह राजनीतिक विराम रहेगा और राजनीतिक पार्टियों को आम जनता तो दूर कार्यकर्ता को भी पकड़ना मुश्किल जाएगा ऐसे में माना जा सकता है कि 2023 के चुनावी समर में उतरने के पहले राजनीतिक दलों में अपना वार्म अप मैच खेल लिया।


