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दीवालपोतु प्रत्याशी से सावधान

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बिलासपुर, 3 जुलाई 2023। दीवाल पर नाम लिखवाने से यदि विधानसभा चुनाव की टिकट तय होती है तो बिलासपुर जिले की मस्तूरी आरक्षित सीट के लिए हर नेता अपना दावा पक्का मान सकते हैं इसी के साथ यह भी कहा जा सकता है रायपुर और बिलासपुर आने वाले ईडी और आईटी के अधिकारी यदि एक बार मस्तूरी क्षेत्र का भ्रमण कर ले तो वे कई नेताओं को इनकम टैक्स का नोटिस जरूर भेज देंगे। 
मस्तूरी में वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस को भले ही मुकी खानी पड़ी और उसका नंबर तीसरे पायदान पर है पर सत्ता में होने के कारण इस क्षेत्र के तमाम कांग्रेसी नेताओं को हाईकमान का पूरा भरोसा है। यही कारण है कि नेता तो नेता पार्टी संगठन के बड़े पद पर बैठने वाले भी दीवाल पोत राजनीति में व्यस्त हैं। इन नेताओं का सामान्य ज्ञान जबरदस्त है इन्हें पता है कि आचार संहिता लगने के बाद दीवाल पोतना कानूनन जुर्म हो जाएगा और संपत्ति विरूपण अधिनियम के तहत उन पर जुर्माना भी किए जा सकते हैं ऐसे में किसी की दीवाल पोतने के पहले उसकी लिखित अनुमति जरूरी हो जाएगी। पर अभी मात्र दबदबे से काम चल रहा है वॉल पेंटिंग और पेंटर को ही भुगतान करना पड़ता है लिहाजा पेट्रोल वाला, गैस वाला, रेडी टू ईट वाला सब अपने-अपने आका का आशीर्वाद होना दिखाकर दीवाल पर इतिहास रच रहे हैं। 
मस्तूरी विधानसभा सीमा क्षेत्र प्रारंभ होते ही दीवाल पोतने का जो सिलसिला प्रारंभ होता है वह मुख्य मार्ग के साथ- साथ अंदरूनी क्षेत्र में भी चला जाता है। दावेदार खेल में देर से आने वाले खिलाड़ी के लिए स्थान छोड़ने के पक्षधर दिखाई नहीं देते ऐसे में अब पेड़ों की शामत आने वाली है।