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महाराष्ट्र का सियासी खेल विधानसभा का नहीं लोकसभा चुनाव का इशारा है

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बिलासपुर, 2 जुलाई 2023। राजनीति के खाटी जानकारों का मानना यही था कि आज नहीं तो आज एनसीपी को टूटना ही है अगर जबरदस्ती टूटने से नहीं रोका होता तो शरद पवार का एक ही हाथ टूटता एक बच जाता पर अति होशियारी के कारण उन्होंने अपने दोनों हाथ गवा दिया। 
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के लिए शरद पवार अजीत पवार और प्रफुल्ल पटेल को अपना दायां बायां हाथ मानते थे। विधानसभा चुनाव जब समाप्त ही हुआ था तो अजीत पवार शरद पवार का साथ छोड़कर चले ही गए थे कुछ तिकड़म करके ले आए गए। महा विकास आघाडी की सरकार बनी पवार को पावर मिल गया तो टिके रहे प्रफुल पटेल हमेशा केंद्र की राजनीति में रहे हैं। महा विकास आघाडी की सरकार शिवसेना में टूट के कारण गिरी उसी के बाद से अजित पवार पर भाजपा की नजरें टिकी हुई थी एक बार अजीत पवार चले भी गए पर फिर से घेर कर ले आया गया तभी यह तय था कि शरद पवार को अपने राजनैतिक दल एनसीपी में छोटी टूट पसंद नहीं है परिणाम घर में अजित पवार ने बड़ी गंदगी की और अपने साथ बड़ी मात्रा में अपने समान लोगों को ले गए। असल में अभी हमारे यहां राजनीति का विदप चेहरा चल रहा है और जनता के द्वारा चयनित विधायक या सांसद को सदन में पहुंचने ही नहीं दिया जाता क्योंकि सदन में जनता के द्वारा चयनित प्रतिनिधि पहुंचता है और बतौर निर्वाचित जनप्रतिनिधि उसकी भूमिका एक सी होती है फिर भले ही वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का इसलिए सत्तारूढ़ दल बड़े कुटिलता के साथ सदन की बैठक की कम करते जा रहे हैं और लोकतंत्र में केवल सत्ता पक्ष के निर्वाचित जनप्रतिनिधि का दबदबा है इसलिए उसे राजनीतिक दल के जनप्रतिनिधि सत्ताधारी दल के शिकार हो जाते हैं। जो सत्ता में नहीं होते अन्यथा स्वास्थ्य लोकतंत्र में तो विपक्षी विधायक की राजनीतिक हैसियत हमेशा सत्ताधारी विधायक से ऊंची होती थी।