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मंदी के दौर में आ गई रैली की उछाल
- By 24hnbc --
- Saturday, 01 Jul, 2023
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बिलासपुर, 2 जुलाई 2023। अपने आप नेता को सुनने जनता पहुंचे वैसा नेता अब छत्तीसगढ़ में नहीं है के बावजूद किसी भी रैली में राजनैतिक दल कोई भी हो भीड़ 1 लाख के नीचे का दावा कभी किया ही नहीं जाता आखिर लाखों की भीड़ सभा स्थल का फाइव स्टार इंतजाम नाश्ता, बोतलबंद पानी, वाहन सुविधा जिसमें बस ऑटो से लेकर एक्सयूवी तक शामिल है आता कहां से है। बिलासपुर शहर में 10 दिन के भीतर तीन सभा हुई और तीनों में लग्जरी सुविधा देखकर फिर से इस बारे में चर्चा जरूरी है कि चुनाव और राजनीति में उपयोग होने वाला फंड आता कहां से है। छत्तीसगढ़ का पहला चुनाव 2003 से ही चुनाव में पैसे की बरसात दिखाई देने लगी थी। चुनाव के बाद तो विधायकों की खरीद-फरोख्त का जो दृश्य दिखाई दिया वह अब पूरे भारत का वाजपेई मॉडल बन गया है। विधानसभा महाराष्ट्र का वह नारा कौन भूल सकता है जिसमें खोके को लेकर सदन के अंदर ही नारेबाजी हुई थी। पर हम उस पैसे की बात ही नहीं कर रहे हैं हम तो उस पैसे की बात कर रहे हैं जिसके बगैर ना तो रैली हो सकती है ना पब्लिक लाई जा सकती है। सत्ताधारी दल का कार्यक्रम में तो जगजाहिर है कि मितानिन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भीड़ लेकर आता है फिर भी सब जानते हैं कि आने वाली जनता को अतिरिक्त भुगतान करने होते हैं। गैर सरकारी कार्यक्रम कैसे संपन्न होती है इसके पीछे हर राजनीतिक दल के पास अपने अपने तयशुदा कार्यक्रम है छत्तीसगढ़ में कोयला और सीमेंट दो प्रमुख स्रोत हैं यहां से राजनीतिक कार्यक्रमों को रसद मिलती है। बिलासपुर में पिछले 6 महीने में कितनी जनसुनवाई उद्योग लगाने को लेकर हुई और उस जनसुनवाई में विरोध का बिगुल किसने कहा बजाया और अब जिसका विरोध हुआ वह कहां कहां सक्रिय दिखाई दे रहा है सूत्र बताते हैं कि एक राजनीतिक दल के सक्रिय पदाधिकारियों ने तो कुछ कोयला उद्योगपतियों को विधानसभा प्रत्याशी बनने का भी आमंत्रण दिया। पर कोई भी उद्योगपति सीधे चुनाव लड़ कर अपनी आफत मोल नहीं लेना चाहता उसे बेहतर रास्ता यही दिखाई देता है कि सभी राजनीतिक दल को उनके कद के अनुरूप सहयोग राशि दे दी जाए और यह खेल बिलासपुर जिले में सिर चढ़कर चल रहा है याद करें प्राकृतिक संपदा सरगुजा क्षेत्र में लूटी जा रही है और विरोध बिलासपुर शहर में खूब हुआ आज चेहरे याद करें कि इस विरोध में कौन कौन शामिल था और यह चेहरे किस राजनीतिक दल के नेता हैं इतना ही नहीं राजनैतिक दलों की रैली में आने वाली भीड़ कामन है जो श्रोता फुटबॉल मैदान जाता है वही लाल बहादुर शास्त्री में जाता है और वही साइंस कॉलेज मैदान में जाता है असल में पब्लिक लाने के पीछे लाल बहादुर ही जिम्मेदार है हालांकि अब इस श्रेणी का नोट बंद हो गया है पर उससे छोटा तो चल रहा है, लंच पैकेट तो चल रहा है और भीड़ लाने की दूसरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी टिकटआथी की होती है। कौन प्रत्याशी कितने मुंडी लेकर आएगा यह उसका सर दर्द है कैसे लाएगा संबंधों में लाएगा, पैसे से लाएगा या इंतजाम से लाएगा भाषण देने वाले नेता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है अभी जब छत्तीसगढ़ में खेती किसानी का समय है तो बाजार सूत्र कहते हैं कि सुनने वाले का रेट बढ़ गया है और किसी भी सब्जी से यह रेट 3 गुना महंगा है। कुछ लोग तो ऐसी रैली को ज्यादा से ज्यादा आयोजित हो कि मन्नत करते हैं।


