24hnbc
छत्तीसगढ़ में एसटी की सीट 34 से 29 किसने की, कौन कर रहा है एसटी का भला
- By 24hnbc --
- Saturday, 01 Jul, 2023
24hnbc.com
बिलासपुर, 2 जुलाई 2023। अभी तारीख पर तारीख पुराना डायलॉग हो गया है नया डायलॉग है झूठ पर झूठ झूठ पर झूठ और इस फेकोलॉजी में यदि कोई प्रतियोगिता होती तो एक से 10 तक भाजपा का नेता ही आता बाकी सब तो झूठ के नाम पर आधा सत्य बोलने लगते हैं जो तेजी जो आत्मविश्वास भाजपाई झूठ में है वो अन्य किसी झूठ में नहीं, हमने अपने कल के समाचार विश्लेषण में भाजपा के दो नेता देश के गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के भाषणों के चाशनी मिश्रित झूठ की चर्चा की थी आज भारतीय जनता पार्टी के एक पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के झूठ की चर्चा करते हैं। उन्होंने कांकेर में अपने भाषण में कहा आदिवासियों का भला केवल भाजपा करती है और अन्य कोई राजनैतिक दल ऐसा नहीं करता यहीं से झूठ शुरू होता है छत्तीसगढ़ वर्ष 2001 में बना निसंदेह इसका श्रेय उस समय के प्रधानमंत्री को जाता है पर यह ध्यान रखने योग्य बात है कि मध्य प्रदेश से बंटवारे के समय छत्तीसगढ़ में आदिवासी सीट की संख्या 34 थी। 2004 में डीलिमिटेशन हुआ और सीट की संख्या घटकर 29 हो गई उसके बाद कभी भी छत्तीसगढ़ में आदिवासी एक्सप्रेस नहीं चल पाई। आदिवासियों का इतना बड़ा भला किसने किया यही नहीं उस समय का जो मसौदा बाहर आया था उसमें कांकेर लोकसभा सीट जो एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है उसे भी सामान्य किया जा रहा था पर एसटी वर्ग के भारी विरोध के कारण यह ना हो सका। जब डीलिमिटेशन की कार्यवाही चल रही थी तब बस्तर और जसपुर क्षेत्र के 800 गांवों को वीरान बताकर यह पूरा खेल किया गया कौन नहीं जानता कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद है पर इस नक्सलवाद के कारण कभी भी 800 गांव वीरान नहीं हुए पर भाजपा है आदिवासियों का भला करती है और इस खेल से उसने 34 आरक्षित सीटों की संख्या घटाकर 29 कर दी। अब यही लोग आदिवासियों का भला करने यूसीसी प्रोग्राम ले आए देश में ऐसा कभी नहीं हुआ कि बिना किसी कानून के ड्रॉफ्ट के उस पर सुझाव मंगा जाने लगे पर यह जुमलेबाजी की सरकार है और यहां देश के हर वर्ग जाति धर्म लिंग के नागरिक को एक ही कुर्ता पहनाना है। आदिवासी नागरिकों के बीच यूसीसी को लेकर अब विरोध सीधा सामने आ रहा है एनपीपी पार्टी के मेघालय के मुख्यमंत्री ने यूसीसी का विरोध किया है यहां यह जानना जरूरी है कि एनसीपी केवल मेघालय की पार्टी नहीं है वे मणिपुर, नागालैंड , अरुणाचल प्रदेश में भी प्रभाव कारी उपस्थिति रखते हैं और भाजपा की सहयोगी पार्टी है। देश के कुल राज्यों में केवल पांच ऐसे राज्य हैं जहां पर अनुसूचित जनजाति के नागरिक निवास नहीं करते हैं बाकी स्थानों पर चाहे वह छत्तीसगढ़ हो, झारखंड हो, केरल हो, कर्नाटक हो, अंडमान हो में आदिवासी बड़ी संख्या में है। उदाहरण के तौर पर मिजोरम और लक्ष्यदीप में इनकी कुल उपस्थिति वहां की जनसंख्या का 94% है। ऐसे में यूसीसी को 80-20 का खेल मत समझिए। आर एस एस और भाजपा एसटी वर्ग से उनकी सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक धर्म, परंपरा छीन कर उनके हाथों में मनुस्मृति और पुराण थमा देना चाहती है।


