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कोटा में नहीं चलेगा मरवाही दाव, अब तो कांग्रेस को ढूंढना होगा आदिवासी चेहरा

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बिलासपुर, 21 जून 2023 । बिलासपुर विधानसभा सीट से लगी हुई बेलतरा विधानसभा सीट पर जब से कांग्रेसी नेताओं को यह आभास हुआ है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री यहां से अपने राजनैतिक सलाहकार को टिकट दे सकते हैं तभी से शहरी नेता जंगल की सीट कोटा की ओर भाग रहे हैं। ऐसे नेताओं को लगता है कि कोटा विधानसभा का अर्थ कोटा और रतनपुर है जबकि कोटा में डबरा, चिखला, जलती, बचाली खुर्द, पूरा जैसे छोटे गांव भी है जहां पर शहरी संस्कृति और तड़क-भड़क को स्वीकार ही नहीं किया जाता। मध्य प्रदेश की राजनीति में कोटा विधानसभा का बड़ा जलवा हुआ करता था यहां के विधायक मथुरा प्रसाद दुबे को विधान पुरुष कहा जाता था उसके बाद इस क्षेत्र ने राजेंद्र प्रसाद शुक्ल को अपना विधायक बनाया जो मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे विधि विधाई मंत्री बने उनकी मृत्यु के पश्चात इस सीट की कमान लगातार श्रीमती रेणु जोगी को प्राप्त है पहले वेद कांग्रेस की उम्मीदवार रही और 2018 का चुनाव उन्होंने जेसीसीजे से लड़ा और कांग्रेस का यह भ्रम टूट गया कि कोटा कांग्रेस का गढ़ है। इस बार कांग्रेस के बड़े नेता जब बिलासपुर जिले में कांग्रेस की सीट बढ़ाना चाहते हैं तो वे कोटा की ओर आशा भरी नजरों से देखते हैं। 2018 में जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बन गई तब से कांग्रेस का हर नेता कोटा को अपना कार्यक्षेत्र बना रहा है फिर भले ही वह नगर पालिक निगम बिलासपुर का पार्षद हो या जिला पंचायत का अध्यक्ष जिसे देखो वह कोटा में पर्यटन कर अपनी टिकट फाइनल कर रहा है आश्चर्य की बात यह है कि इन सब नेताओं में एसटी वर्ग से कोई नहीं है। जबकि कोटा में कुल मतदाता का 50 से अधिक प्रतिशत एसटी मतदाताओं का है जिस पर नंबर एक पर गौड, दूसरे पर कवर और तीसरे पर उराव हैं। छत्तीसगढ़ के पहले बाई इलेक्शन कोटा में रेणु जोगी यूं ही नहीं जीती थी उनके जीतने के पीछे दिवंगत नेता अजीत जोगी का अद्भुत चुनाव संचालन मुख्य रूप से रहा। तब से आखरी चुनाव तक उन्होंने रेणु जोगी को कोटा सीट से हारने नहीं दिया इस बार परिस्थितियां अलग है। यदि कांग्रेस को कोटा सीट अपने खाते में डालनी है तो उसे चकाचौंध, ग्लैमर करोड़पति नेता से पिंड छुड़ाना होगा और किसी ऐसे व्यक्ति को टिकट देनी होगी जो जंगल का हो जिसने आदिवासियों के लिए काम किया हो और उन्हीं के बीच उनके समान उठता बैठता हो भले ही नामांकन पत्र भरते समय उसकी संपत्ति कुछ लाख रुपए में ही सिमट जाए पर ऐसा व्यक्ति ही कोटा में कांग्रेस की नैया पार लगा सकता हैं कांग्रेस को इस बात का भी ध्यान देना होगा कि इस विधानसभा क्षेत्र में जोगी परिवार भी चुनाव में उतरेगा भले ही उस का चुनाव चिन्ह कुछ भी रहे और सामान्य सीट होने के कारण किसी भी जाति प्रमाण पत्र के बगैर वे चुनाव लड़ सकते हैं ऐसे में उनके प्रमाण पत्रों का कोटा विधानसभा में कोई अर्थ नहीं रहेगा, पर उन्हें जोगी होने का लाभ पूरा मिलेगा अर्थात मरवाही वाला गांव कोटा में काम नहीं आएगा।