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अब नहीं खोली आंखें तो नहीं लगेगी अनिला की हैट्रिक

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बिलासपुर, 20 जून 2023। बालोद जिले का ब्लॉक डौंडीलोहारा इन दिनों अपने जन आंदोलन के कारण चर्चा में है और इस जन आंदोलन से यह बात बाहर आती है कि इस बार का 5 सालाना इम्तिहान भूपेश की नवरत्न मंत्री अनिला भेड़िया के लिए कठिन होने वाला है। यदि ऐसा हुआ तो वे हैट्रिक लगाने से चूक भी सकती है। अनिला भेड़िया छत्तीसगढ़ सरकार के वित्त मंत्रालय की कैबिनेट मंत्री है उसका नाम है महिला एवं बाल विकास विभाग जब कभी भी कोई मुख्यमंत्री इस विभाग की कमान जिसे देता है तो यह माना जाता है कि वह विधायक मुख्यमंत्री की गुड बुक में काफी ऊपर है, इसलिए हमने अनिला भेड़िया को भूपेश के नवरत्नों में से एक कहा। 
वर्ष 2008 के चुनाव में डौंडीलोहारा में भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीती थी 2013 में अनिला भेड़िया ने यहां पर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा 66000 से ज्यादा मत प्राप्त किए, 18000 प्लस से जीती। भारतीय जनता पार्टी को लगभग 46000 वोट मिले इससे पता चलता है कि इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रति नाराजगी थी। 2018 में अनिला भेड़िया ने फिर से यहां चुनाव जीता राजनीति के जानकार बताते हैं कि अनिला भेड़िया की राजनीतिक सफलताओं के पीछे उनके पुलिस पति दिवंगत रविंद्र भेड़िया का बड़ा हाथ है। डौंडीलोहारा एसटी आरक्षित सीट है और अनिला भेड़िया हलवा एसटी श्रेणी से आती है। और डौंडीलोहारा में आदिवासी हलवा उपजाति का प्रभाव और संख्या ज्यादा है राजनीतिक इतिहास की बात करें तो अनिला भेड़िया 2009 में दुर्ग जिला पंचायत सदस्य थी और 2013 में पहली बार कांग्रेस की टिकट पर चुनाव में उतरी 2018 के कांग्रेस जीत में उन्हें फिर सफलता हाथ लगी और उसी साल बालोद जिले को पहला कैबिनेट मंत्री प्राप्त हुआ लिहाजा जिले के नागरिकों की उम्मीदें उछाल मारने लगी, जिन तीन मांगों को लेकर 27 गांव के आदिवासी 1 महीने से आंदोलनरत हैं उन मांगों को सुनकर पढ़कर यह पता चलता है कि भूपेश की नवरत्न बालोद जिले की पहली महिला कैबिनेट मंत्री के कार्यकाल में काम हुआ ही नहीं.... पहली मांग सहकारी बैंक, पीएचसी और स्वास्थ्य केंद्र और रोड चौड़ीकरण एक मामला जिसके कारण मंत्री को पीपरखार से चुपचाप दबे पांव पलायन करना पड़ा था। शासकीय उचित मूल्य की दुकान चयनित स्थान पर ही खुले। अरजपूरी पोल्ट्री फॉर्म रैंगरबाड़ी क्षेत्र में शिक्षकों की कमी जिस विभाग की ये मंत्री हैं। उसके आंगनबाड़ी केंद्र की छत से गिरने वाला प्लास्टर और घायल होते बच्चे अब आप समझ सकते हैं कि मंत्री रायपुर की चकाचौंध में इतना डूब गया है कि उसे अपने आरक्षित विधानसभा छोटी-छोटी जरूरतें दिखाई ही नहीं देसी उन्हें नहीं दिखाई देते अपने ही एसटी वोटर जो 1 महीने से आंदोलन पर हैं। राजनीति में सहानुभूति कई बार बड़ा काम करती है पर श्रीमती भेड़िया के साथ यह संभव नहीं दिखाई देता आईपीएस अधिकारी रहे रविंद्र भेड़िया कोविड काल में हृदयाघात से चल बसे, पर अब यह पुरानी बात है। ऐसे में राजधानी छोड़ उन्हें अपनी विधानसभा पर ध्यान देना ही होगा सरकार तो उम्मीद करती है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री का विभाग उसकी योजनाएं पूरे राज्य में सत्ताधारी दल को मदद करेगी उलट यहां तो मंत्री को उसी के क्षेत्र में चुनौती मिल रही है।