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भरोसे और मुमकिन दोनों ने किया छल

बिलासपुर की अपेक्षा और उसे मिली उपेक्षा

24hnbc.com
समाचार -
बिलासपुर, 16 जून 2023। आज हम इस विश्लेषण में मध्य प्रदेश वाले बिलासपुर, जोगी वाले बिलासपुर, अमर वाले बिलासपुर और भरोसे के साथ मुमकिन वाले बिलासपुर की चर्चा करेंगे। मध्य प्रदेश वाले बिलासपुर में एक समय था जब बिलासपुर शहर का स्थानीय निकाय और उसके जनप्रतिनिधियों के अपने शहर के साथ लगाओ को अन्य नगरवासी इर्शा के भाव से देखते थे। तब इस शहर में शाम के समय रोड पर सफाई और ठंडक के लिए पानी का छिड़काव भी किया जाता था, मध्य प्रदेश शासन के वक्त बिलासपुर जिला राज्य की राजधानी में बेहद प्रभावशाली और रसूखदार हुआ करता था, जिले के भीतर कैबिनेट मंत्रियों की संख्या तीन से कम कभी नहीं हुई। बिलासपुर से मुख्यमंत्री तो नहीं बना लेकिन इन शहर के हिस्से विधानसभा मध्य प्रदेश की अध्यक्षता, स्वास्थ्य, विधि विधाई, फॉरेस्ट जैसे भारी भरकम मंत्रालय आते थे। सबसे बड़ी बात थी स्थानीय निकाय का मजबूत होना और उसके निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शहर के साथ आत्मिक संबंध तभी तो बिलासपुर में मध्य प्रदेश शासन के समय ही संजय तरण पुष्कर बन सका। 2001 में छत्तीसगढ़ बना और बिलासपुर जिले से अजीत जोगी मुख्यमंत्री बने उन्हें 3 सालों की विकास कार्यों की गति को आज भी लोग याद करते हैं तब मात्र कुछ 100 करोड़ के बजट के बावजूद अजीत जोगी ने दिखाया कि इच्छाशक्ति हो तो आधारभूत कार्य और परंपरागत विकास के काम इतनी तेजी से किए जा सकते हैं। 2003 में भाजपा सरकार आई अब तो बिलासपुर विधायक को खजाने की चाबी मिल गई वे वृत्त मंत्री रहे, स्थानीय निकाय मंत्रालय भी उन्हीं के हाथ रहा, स्वास्थ्य सेवा भी उन्हीं के अधीन आ गई ऐसे में तो बिलासपुर में दिन दूनी रात चौगुनी विकास की गाथा लिखी जा सकती थी पर देखते-देखते वर्षों से आकार लिए बिलासपुर ने दम तोड़ना प्रारंभ किया यहां पर 15 साल की योजनाएं और उनका करोड़ों का बजट लिखने की जरूरत नहीं है शहर के नागरिक, बिलासपुर विधानसभा के नागरिक और युवा जानते हैं कि इतने पैसे से तो शहर की सड़कों पर चांदी की कोटिंग कराई जा सकती थी पर शहर को खोदापुर, गड्ढा पुर जैसी उपमामिली। 
भारतीय जनता पार्टी के अंतिम 5 साल देश में मोदी है तो मुमकिन है क्या आदर्श वाक्य स्थापित हो चुका था पर इस मुमकिन को काला होते, धुंधला होते, किन-किन होते हमने देखा। 4 साल से हम भरोसा देख रहे हैं क्योंकि प्रदेश में कका का शासन है। राज्य के लोग कहते हैं कि कका अभी जिंदा है, हमारी शुभकामनाएं कका के लिए है, वे खूब जीये पर उनका भरोसा बिलासपुर में खरा नहीं उतरा बिलासपुर के खाते में विधायक से लेकर निगम, जिला पंचायत सब कुछ भरोसे में दे दी पर बदले में एक अदद हवाई अड्डा नहीं मिला। शहर के युवाओं की जोश पहले जोन दिला देता था बिलासपुर के जन आंदोलन से भोपाल में बैठा मुख्यमंत्री चिंतित हो उठता था पर अब वह बात नहीं कारण निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का शहर से लगाओ ही नहीं है। अब तो शहर भरोसे और मुमकिन के बीच घड़ी का पेंडुलम बन गया जो यात्रा तो करता है 24 घंटे पर उसे मंजिल हासिल नहीं होती.....।